राजमहल में दीपावली के अवसर पर आयोजित रंगोली एवं घरौंदा प्रतियोगिता में बच्चों ने अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया. प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया.
राजमहल:एकता कला केंद्र, राजमहल द्वारा वैदिक अभय फाउंडेशन के सहयोग से दीपावली के शुभ अवसर पर सिंघी दलान सूर्य देव मंदिर घाट परिसर में रंगोली एवं घरौंदा सजावट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. इस अवसर पर स्थानीय स्कूली बच्चे-बच्चियों ने आकर्षक रंगोली व घरौंदा बनाकर अपनी बेहतरीन प्रतिभा दिखाई. इस आयोजन में बच्चों ने अपनी कल्पनाशीलता, रचनात्मकता और कड़ी मेहनत से बेहद खूबसूरत रंगोलियाँ एवं घरौंदे तैयार किए.
रंगोली और घरौंदा प्रतियोगिता में इन बच्चों ने जीता खिताब
आयोजन के दौरान दो अलग-अलग ग्रुप में बच्चों का मुकाबला हुआ. रंगोली प्रतियोगिता के ग्रुप ए में रिया कुमारी ने प्रथम, वैष्णवी आले ने द्वितीय व श्रेया ने तृतीय स्थान प्राप्त किया. वहीं ग्रुप बी में खुशी कुमारी ने प्रथम, आशा वीरा ने द्वितीय व सान्वी राय ने तृतीय स्थान हासिल किया. दूसरी तरफ, घरौंदा प्रतियोगिता के ग्रुप ए में बानी ने प्रथम, पूर्वा ने द्वितीय व श्रेयांश साहा ने तृतीय स्थान पाया, जबकि ग्रुप बी में मनीष ने प्रथम, सुदीप्त अग्रवाल ने द्वितीय एवं जानवी ने तृतीय स्थान प्राप्त किया.
पारंपरिक कला, संस्कृति और विरासत से नई पीढ़ी को जोड़ना है मुख्य उद्देश्य
इस अवसर पर एकता कला केंद्र की संचालिका एकता राय ने कहा कि रंगोली का महत्व केवल घर के आँगन को सजाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति में शुभता, मंगल और सकारात्मकता का प्रतीक है. वहीं घरौंदा बनाने की परंपरा दीपावली से गहराई से जुड़ी हुई है, जिसे मिट्टी से बने अपने घर के सपनों और खुशहाल जीवन की कामना का प्रतीक माना जाता है. उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से केवल बच्चों की प्रतिभा को मंच देना ही नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी पारंपरिक कला, संस्कृति और विरासत से परिचित कराना भी है.
पुरानी परंपराओं को पुनर्जीवित करने का एक सराहनीय प्रयास
इस अवसर पर विशेष अतिथि एवं निर्णायक भुदेव कुमार ने बच्चों की कलाकृतियों का मूल्यांकन किया और उनका उत्साहवर्धन किया. उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन से बच्चों में कला के प्रति उत्साह बढ़ता है. दीपावली के अवसर पर घरों में घरौंदा बनाना हमारी बहुत पुरानी परंपरा है, जिसे एकता कला केंद्र द्वारा पुनर्जीवित करने का बेहतरीन प्रयास किया गया है. यह प्रतियोगिता हमारी कला, संस्कृति, परंपरा और नई पीढ़ी के बीच एक खूबसूरत जुड़ाव बनाने का काम कर रही है. कार्यक्रम के अंत में सफल प्रतिभागियों के बीच अतिथियों द्वारा पारितोषिक का वितरण किया गया.
इन्होंने निभाई कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य भूमिका
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में अमिता चक्रवर्ती, मृत्युंजय राय, पापड़ी अरविंद साहा, अमित साहा, जयंती राय, गुरु प्रसाद महतो, इंदु देवी, निमाई, दिशा कुमारी, कामना राय, रौनक कुमार यादव सहित वैदिक अभय फाउंडेशन के सभी सदस्यों ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.



