ईडी अधिकारियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज प्राथमिकी को चुनौती देने वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर आठ हजार रुपये जुर्माना लगाया. अगली सुनवाई नौ दिसंबर को होगी.
रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने ईडी के अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य सरकार पर 8000 रुपये का जुर्माना लगाया है. ईडी अधिकारियों की ओर से दायर क्रिमिनल क्वैशिंग याचिका में एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज प्राथमिकी को निरस्त करने की मांग की गई है. जस्टिस अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है. हालांकि, अदालत ने समय देने के साथ जुर्माना भी लगाया और इसकी राशि झारखंड स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (झालसा) में जमा करने का निर्देश दिया.
सरकार ने मांगी थी 4 हफ्ते की मोहलत
सुनवाई के दौरान अदालत ने मामले में प्रतिवादी नंबर एक राज्य सरकार का पक्ष सुना. राज्य सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का अतिरिक्त समय देने का आग्रह किया गया था. अदालत ने सरकार के आग्रह को स्वीकार करते हुए आठ हजार रुपये का जुर्माना लगाकर चार सप्ताह के लिए सुनवाई स्थगित कर दी. अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रार्थियों के खिलाफ पीड़क कार्रवाई पर रोक लगाने संबंधी पूर्व में पारित अंतरिम आदेश अगले आदेश तक प्रभावी रहेगा. मामले की अगली सुनवाई के लिए नौ दिसंबर की तारीख निर्धारित की गयी है.
ईडी अधिकारियों ने थाने में दर्ज प्राथमिकी पर दी चुनौती
यह मामला ईडी के तत्कालीन अपर निदेशक कपिल राज और अन्य अधिकारियों की ओर से दायर क्रिमिनल क्वैशिंग याचिका से जुड़ा है. प्रार्थियों ने रांची के एससी-एसटी थाना में दर्ज प्राथमिकी संख्या 06/2024 को चुनौती देते हुए उसे निरस्त करने का आग्रह किया है. याचिका में ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की गयी है. ईडी की ओर से वरीय अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरभ कुमार ने अदालत में पक्ष रखा. मामले में राज्य सरकार प्रतिवादी नंबर एक है. सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा गया, जिस पर अदालत ने जुर्माने के साथ मोहलत प्रदान की.
31 जनवरी 2024 को दर्ज करायी गयी थी प्राथमिकी
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 31 जनवरी 2024 को ईडी की पूछताछ के दौरान एससी-एसटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज करायी थी. प्राथमिकी में ईडी के तत्कालीन अपर निदेशक कपिल राज, सहायक निदेशक देवव्रत झा, अनुपम कुमार, अमन पटेल समेत अन्य अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है. प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि दिल्ली स्थित मुख्यमंत्री के आवास पर ईडी ने तलाशी ली थी. मुख्यमंत्री की ओर से आरोप लगाया गया कि इस कार्रवाई के कारण उन्हें मानसिक और सामाजिक रूप से प्रताड़ित किया गया. यह भी आरोप लगाया गया था कि ईडी अधिकारियों ने तलाशी से संबंधित जानकारी मीडिया में लीक की, ताकि आम लोगों के बीच उनकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचे.
प्राथिमिकी निरस्त करने की मांग कर रहे ईडी अधिकारी
इसी प्राथमिकी को चुनौती देते हुए ईडी अधिकारियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. प्रार्थियों ने अदालत से प्राथमिकी को निरस्त करने की मांग की है. फिलहाल अदालत ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है. साथ ही प्रार्थियों को अंतरिम राहत जारी रखते हुए अगली सुनवाई नौ दिसंबर को निर्धारित की है.



