झारखंड में जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित गरीब बच्चों को ‘गिफ्ट ऑफ लाइफ’ कार्यक्रम के तहत मुफ्त इलाज मिलेगा. सरकार 15 लाख रुपये तक का खर्च उठाएगी.
रांची: झारखंड में जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित गरीब बच्चों के इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक विशेष पहल शुरू की है. रिम्स रांची के ऑडिटोरियम में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने स्वास्थ्य विभाग और अमृता हॉस्पिटल, कोच्चि के संयुक्त तत्वावधान में ‘गिफ्ट ऑफ लाइफ’ कार्यक्रम का शुभारंभ किया. इस अभियान के तहत राज्य के विभिन्न जिलों से पहुंचे करीब 380 बच्चों की स्क्रीनिंग की गयी. इनमें बीमारी की पुष्टि होने और चिकित्सकीय जरूरत के आधार पर बच्चों को आगे की जांच और उपचार के लिए चयनित किया जायेगा.
इलाज के अभाव में न हो किसी बच्चे की मौत
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि उनका प्रयास है कि झारखंड में किसी गरीब बच्चे की मौत इलाज के अभाव में नहीं हो. उन्होंने कहा कि उन्होंने गरीबी और आर्थिक तंगी के कारण गंभीर बीमारियों से जूझते बच्चों के परिवारों की परेशानियों को करीब से देखा है. कई माता-पिता अपने बच्चों का इलाज कराने के लिए जमीन-जायदाद तक बेचने को तैयार हो जाते हैं. इसी अनुभव ने उन्हें जरूरतमंद बच्चों की मदद करने का संकल्प लेने के लिए प्रेरित किया.
10 से 15 लाख रुपये तक के इलाज का खर्च उठायेगी सरकार
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के उपचार के लिए सरकार आर्थिक सहायता उपलब्ध करायेगी. उन्होंने बताया कि जरूरत के अनुसार पांच से 10 लाख रुपये और गंभीर मामलों में 10 से 15 लाख रुपये तक के उपचार का खर्च उठाने की व्यवस्था की जायेगी.
आर्थिक तंगी की वजह से नहीं रुकेगा इलाज
इस पहल का उद्देश्य आर्थिक तंगी के कारण बच्चों का इलाज नहीं करा पाने वाले परिवारों को राहत देना है. उपचार की जरूरत के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सकों की सलाह पर आगे की जांच, दवाओं और ऑपरेशन की योजना बनायी जायेगी. प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, उपचार प्रक्रिया में अस्पताल में रहने, भोजन, यात्रा और ऑपरेशन के बाद फॉलोअप जैसी जरूरतों को भी शामिल करने की व्यवस्था का उल्लेख किया गया है. हालांकि, प्रत्येक बच्चे के इलाज पर होने वाला वास्तविक खर्च उसकी बीमारी की प्रकृति, आवश्यक जांच और उपचार की पद्धति पर निर्भर करेगा.
अमृता हॉस्पिटल, कोच्चि के विशेषज्ञ करेंगे उपचार
‘गिफ्ट ऑफ लाइफ’ कार्यक्रम के तहत अमृता हॉस्पिटल, कोच्चि के विशेषज्ञ चिकित्सक बच्चों की जांच और उपचार में सहयोग करेंगे. स्क्रीनिंग के बाद जिन बच्चों में जन्मजात हृदय रोग की पुष्टि होगी, उनकी बीमारी की गंभीरता का आकलन किया जायेगा. इसके आधार पर तय होगा कि बच्चे को नियमित निगरानी, दवाओं, कैथेटर आधारित उपचार या सर्जरी की जरूरत है. जन्मजात हृदय रोग में कुछ बच्चों के दिल की बनावट में जन्म से ही असामान्यता होती है. कुछ मामलों में हृदय के कक्षों के बीच छेद होता है, जबकि कुछ बच्चों में वाल्व या प्रमुख रक्त वाहिकाओं से संबंधित समस्याएं होती हैं. हर बच्चे को ऑपरेशन की जरूरत नहीं होती. उपचार का निर्णय विशेषज्ञ चिकित्सक जांच के बाद लेते हैं.
माता-पिता की परेशानी दूर करना प्राथमिकता
कार्यक्रम के दौरान अपने बच्चों को लेकर पहुंचे कई माता-पिता भावुक हो गये. उन्होंने आर्थिक परेशानियों के कारण इलाज में आ रही कठिनाइयों का जिक्र करते हुए सरकार की पहल के प्रति आभार जताया. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि गरीब माता-पिता की परेशानी और उनके बच्चों की जिंदगी से यह अभियान जुड़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि जब कोई बच्चा इलाज के बाद स्वस्थ होकर घर लौटेगा, तभी इस प्रयास की सफलता का वास्तविक अर्थ सामने आयेगा.
जरूरतमंद बच्चों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचाने की अपील
स्वास्थ्य मंत्री ने जनप्रतिनिधियों और आम लोगों से अपील की कि उनके क्षेत्र में जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित कोई बच्चा आर्थिक तंगी के कारण इलाज नहीं करा पा रहा है, तो उसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचायी जाये. उन्होंने माता-पिता से भी बच्चों में बीमारी के संभावित लक्षण दिखने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की. कार्यक्रम में रिम्स के निदेशक डॉ. डीके सिन्हा, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा, अमृता हॉस्पिटल के डॉ. ब्रजेश, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, चिकित्सक और बच्चों के अभिभावक मौजूद थे.



