श्याम विश्वकर्मा बना रहे 12 फीट की भव्य बिरसा मुंडा प्रतिमा, टेराकोटा और बांस की कलाकृतियों से सजेगा परिसर
साहिबगंज। झारखंड की धरती के महान जननायक और स्वतंत्रता सेनानी भगवान बिरसा मुंडा के जीवन, संघर्ष और बलिदान की गाथा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। उनके जीवन से जुड़े संग्रहालय को भव्य स्वरूप देने के लिए तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इस संग्रहालय में साहिबगंज के टेराकोटा कलाकार श्याम विश्वकर्मा अपनी कला के माध्यम से धरती आबा की जीवनगाथा को जीवंत रूप देने में अहम योगदान दे रहे हैं। उनके द्वारा 12 फीट ऊंची भगवान बिरसा मुंडा की भव्य प्रतिमा भी तैयार की जा रही है, जो संग्रहालय के प्रमुख आकर्षणों में शामिल होगी।
15 नवंबर को झारखंड स्थापना दिवस के अवसर पर इस संग्रहालय के उद्घाटन की तैयारी की जा रही है। इस मौके पर देश की राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, झारखंड के मुख्यमंत्री सहित कई बड़े नेताओं और मंत्रियों के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, इन अतिथियों के आगमन और कार्यक्रम में उनकी भागीदारी की आधिकारिक पुष्टि होने के बाद ही इसे अंतिम रूप से तय माना जा सकेगा। संभावित कार्यक्रम को देखते हुए संग्रहालय परिसर को भव्य रूप देने और शेष कार्यों को समय पर पूरा करने की दिशा में तैयारियां तेज की जा रही हैं।
गंगा की मिट्टी से तैयार हो रही 12 फीट की भव्य प्रतिमा :

इस संग्रहालय के लिए श्याम विश्वकर्मा साहिबगंज की गंगा की मिट्टी से टेराकोटा कलाकृतियां तैयार कर रहे हैं। इन्हीं के हाथों भगवान बिरसा मुंडा की 12 फीट ऊंची प्रतिमा आकार ले रही है। प्रतिमा को भव्य और आकर्षक स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि संग्रहालय पहुंचने वाले लोगों के लिए यह विशेष आकर्षण बने।
प्रतिमा के साथ-साथ टेराकोटा कलाकृतियों के माध्यम से भगवान बिरसा मुंडा के बचपन, सामाजिक जागरण, आदिवासी समाज को एकजुट करने, अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आंदोलन और उनके जीवन के अंतिम पड़ाव तक की कहानी प्रस्तुत करने की तैयारी है। इन दृश्यों के जरिए आगंतुक उनके संघर्ष और विचारों को केवल पढ़ ही नहीं सकेंगे, बल्कि कलात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से उन्हें करीब से समझ भी सकेंगे।
कलाकृतियों में दिखेगा आंदोलन, संघर्ष और जीवन के अनछुए पहलू :

भगवान बिरसा मुंडा का जीवन आदिवासी अस्मिता, स्वाभिमान और जल, जंगल तथा जमीन के अधिकारों के लिए संघर्ष का प्रतीक रहा है। संग्रहालय में तैयार की जा रही कलाकृतियों के जरिए यह दिखाने का प्रयास है कि उन्होंने किस तरह लोगों को एकजुट किया और अंग्रेजी शासन के खिलाफ आंदोलन को नई दिशा दी। उनके जीवन से जुड़े विभिन्न प्रसंगों को दृश्य रूप में प्रस्तुत करने की योजना है, ताकि नई पीढ़ी उनके ऐतिहासिक योगदान को बेहतर ढंग से समझ सके।
संग्रहालय में उनके विश्राम और सुरक्षा से जुड़े एक प्रसंग को भी कलात्मक रूप में दर्शाने की जानकारी है, जिसमें दो महिलाओं को उनकी सुरक्षा में तैनात दिखाया गया है। ऐसे दृश्य उनके जीवन से जुड़े पहलुओं को सामने लाने का माध्यम बनेंगे।
बांस की कलाकृतियां और खपरेनुमा प्रवेश द्वार देंगे खास पहचान :
संग्रहालय को आकर्षक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए टेराकोटा के साथ बांस की कलाकृतियां भी तैयार की जा रही हैं। इस कार्य में असम से आई टीम के शामिल होने की जानकारी है। वहीं, संग्रहालय का प्रवेश द्वार खपरेनुमा आकृति में बनाया गया है, जो इसकी बनावट को विशिष्ट पहचान देता है। प्रशासन की ओर से परिसर के नवीनीकरण और विकास कार्यों को पूरा करने के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं।
15 नवंबर को झारखंड स्थापना दिवस के अवसर पर प्रस्तावित उद्घाटन को ध्यान में रखते हुए संग्रहालय को भव्य रूप देने की तैयारी है। इस पहल का उद्देश्य भगवान बिरसा मुंडा की विरासत को संरक्षित करना और आने वाली पीढ़ियों को उनके संघर्ष, विचारों तथा बलिदान से परिचित कराना है। साहिबगंज की गंगा की मिट्टी से आकार लेती कलाकृतियां स्थानीय कला को पहचान देने के साथ धरती आबा की गौरवगाथा को नई अभिव्यक्ति देंगी।



