मानसिक बीमारी का बहाना बनाकर पत्नी से शादी रद्द कराने की पति की कोशिश नाकाम रही. झारखंड हाईकोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में उसकी अर्जी खारिज कर दी.
Marriage Annulment Case: पत्नी को मानसिक रूप से बीमार बताकर विवाह रद्द करने की मांग करनेवाले पति को झारखंड हाइकोर्ट से राहत नहीं मिली. कोर्ट ने पति की अपील याचिका खारिज कर दी. अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति पर मानसिक बीमारी का आरोप लगा देना पर्याप्त नहीं है. विवाह रद्द कराने के लिए आरोपों को साबित करने के वास्ते ठोस साक्ष्य प्रस्तुत करना जरूरी है.
फैमिली कोर्ट के फैसले को दी थी चुनौती
यह फैसला चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने सुनाया. मामले में बोकारो फैमिली कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में पति की याचिका खारिज कर दी थी. इसके बाद पति ने फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए हाइकोर्ट में अपील दायर की थी.
बीमारी छिपाकर शादी कराने का लगाया था आरोप
पति ने फैमिली कोर्ट में हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 12(1)(बी) के तहत मुकदमा दायर कर विवाह रद्द करने की मांग की थी. उसका आरोप था कि पत्नी मानसिक अस्वस्थता, न्यूरोलॉजिकल समस्या, मिर्गी या लकवा जैसी बीमारी से पीड़ित थी. पति के अनुसार, यह समस्या शादी से पहले से थी और इसकी जानकारी छिपाकर विवाह कराया गया था. हालांकि, फैमिली कोर्ट में पति अपने आरोपों के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका. इसी आधार पर उसकी याचिका खारिज कर दी गयी थी. हाइकोर्ट ने भी पति की अपील खारिज कर दी.



