झारखंड के तीन जिलों ने HIV कंट्रोल में NACO का ट्रिपल 95% स्कोर हासिल कर लिया है.
रांची: देश के साथ-साथ झारखंड ने भी एचआईवी नियंत्रण के प्रयासों में बड़ी सफलता हासिल की है. हालांकि इस दिशा में अभी बहुत काम बाकी है, लेकिन प्रारंभिक सफलता उत्साहवर्धक है.
राज्य के तीन जिलों सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम और साहिबगंज ने एचआईवी नियंत्रण के मामले में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. इन जिलों ने नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (नाको) द्वारा निर्धारित 95-95-95 प्रतिशत स्कोर का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है. ट्रिपल 95 प्रतिशत का लक्ष्य हासिल करने के बाद ये तीनों जिले नाको द्वारा निर्धारित ‘सेफ’ (सुरक्षित) श्रेणी में आ गए हैं.
अब इन तीनों जिलों को और बेहतर ‘सेफ प्लस’ (सुरक्षित प्लस) श्रेणी में आने के लिए और प्रयास करने होंगे. इसके लिए सभी गर्भवती महिलाओं की एचआईवी, सिफलिस और हेपेटाइटिस बी की 100 प्रतिशत जांच सुनिश्चित करनी होगी. जिन जिलों में गर्भवती माँ से बच्चे में एचआईवी, सिफलिस और हेपेटाइटिस बी का संक्रमण शून्य होगा, उन्हें ही ‘सुरक्षित प्लस’ श्रेणी में शामिल होने का सम्मान मिलेगा.
नाको ने विश्व एड्स दिवस-2027 (1 दिसंबर 2027) तक भारत में एचआईवी पर नियंत्रण प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है. 1 दिसंबर 2026 तक सभी जिलों को ट्रिपल 95 प्रतिशत (95-95-95) स्कोर हासिल करना इसी लक्ष्य को प्राप्त करने का शुरुआती पड़ाव है. इसे प्राप्त करने के साथ-साथ 2027 के विश्व एड्स दिवस तक इस स्थिति को निरंतर बनाए रखना भी जरूरी होगा.
झारखंड स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी (जेसैक्स) के परियोजना निदेशक आईएएस अधिकारी शशि प्रकाश सिंह बताते हैं कि तीन जिलों में ट्रिपल 95 प्रतिशत का लक्ष्य हासिल करना वास्तव में उत्साहवर्धक है, लेकिन इसे राज्य के सभी 24 जिलों में प्राप्त करना है. उन्होंने कहा कि हमारा प्रयास सुरक्षित जिलों को सुरक्षित प्लस श्रेणी में लाने का है और पीछे छूट गए जिलों को भी सुरक्षित श्रेणी में लाना है. साथ ही इन उपलब्धियों को आगे भी बनाए रखना बड़ी जिम्मेदारी और जवाबदेही है.
एचआईवी नियंत्रण के प्रयासों के तहत रांची सहित राज्य के कुल आठ जिले इन तीन जिलों से कमजोर लेकिन बाकी 13 जिलों से बेहतर स्थिति में हैं. लोहरदगा, कोडरमा, गुमला, पश्चिमी सिंहभूम, बोकारो, हजारीबाग, दुमका और रांची ये आठ जिले ‘सक्षम’ श्रेणी में शामिल हैं. इन जिलों ने ट्रिपल 95 प्रतिशत की जगह किसी दो मानकों में 95 प्रतिशत स्कोर हासिल किया है.
तीनों मानकों (गर्भवती महिलाओं की एचआईवी, सिफलिस और हेपेटाइटिस बी की 100 प्रतिशत जांच) के आधार पर 13 जिले ऐसे हैं जहां 95-95-95 स्कोर के तीन में से केवल एक या कोई भी लक्ष्य हासिल नहीं किया गया है. इनमें सिमडेगा सबसे पीछे है (72-67-93). इसके बाद पाकुड़, रामगढ़, देवघर, गोड्डा, जामताड़ा, चतरा, खूंटी, धनबाद, गिरिडीह, लातेहार, गढ़वा और पलामू शामिल हैं. इन जिलों में एचआईवी नियंत्रण के लक्ष्य हासिल करने के लिए काफी प्रयास करने होंगे.



