झारखंड में भालू के बढ़ते हमलों से दहशत है. 2026 में 7 जिलों में 15 घटनाएं सामने आईं, जिनमें 16 लोग घायल हुए और बोकारो में एक की मौत हुई. लातेहार में सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए.
रांची. झारखंड के जंगलों से सटे इलाकों में भालू और इंसानों के बीच टकराव की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं. 2026 में अब तक स्वतंत्र मीडिया में प्रकाशित रिपोर्टों को जुटाने पर राज्य के कम से कम सात जिलों में भालू के हमले की 15 घटनाएं सामने आती हैं. इन घटनाओं में 16 लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि बोकारो में एक ग्रामीण की मौत की खबर सामने आयी है. उपलब्ध रिपोर्टों के इस संकलन में लातेहार में सबसे अधिक लोगों के प्रभावित होने की जानकारी मिलती है.
हालांकि, यह आंकड़ा वन विभाग का आधिकारिक राज्यव्यापी डेटाबेस नहीं है. यह 30 सितंबर 2026 तक अलग-अलग स्वतंत्र मीडिया संस्थानों में प्रकाशित घटनाओं का संकलन है. इसलिए वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है.
लातेहार में एक सप्ताह में चार घटनाएं, पांच लोग घायल
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार लातेहार का महुआडांड़ क्षेत्र इस साल भालू के हमलों का प्रमुख केंद्र रहा. जुलाई में महुआडांड़ रेंज में एक सप्ताह के भीतर चार अलग-अलग घटनाओं में पांच लोग घायल हुए. इनमें दो किशोर भी शामिल थे, जिन पर जंगल में खुखड़ी और पुटु चुनने के दौरान भालू ने हमला किया था.
9 जुलाई की घटना में जरहा गांव के कमलेश नगेसिया और प्रमोद केरकेट्टा घायल हुए थे. दोनों जंगल में जंगली मशरूम चुन रहे थे. इससे पहले भी उसी क्षेत्र में भालू के हमले की घटना सामने आयी थी. बाद में वन विभाग की ओर से ग्रामीणों को जंगल में जाते समय सावधानी बरतने को लेकर जागरूक किया गया.
पश्चिमी सिंहभूम में तीन अलग घटनाएं
पश्चिमी सिंहभूम में भी 2026 के दौरान कम से कम तीन अलग-अलग भालू हमलों की रिपोर्ट मिली है. मई में चाईबासा के पास खेत से लौट रहे 35 वर्षीय दामु पर भालू ने हमला किया था. इसके बाद मझगांव क्षेत्र में एक युवक पर दो भालुओं के हमले की घटना सामने आयी. इन घटनाओं में ग्रामीणों को गंभीर चोटें आयीं.
इस तरह उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर पश्चिमी सिंहभूम में कम से कम तीन लोग भालू के हमले में घायल हुए.
गुमला और लोहरदगा में भी दो-दो घटनाएं
गुमला के पालकोट क्षेत्र में जून में 45 वर्षीय सुकरु बिंझिया पर तीन जंगली भालुओं ने हमला किया था. सितंबर में बिशुनपुर के निरासी जंगल में बकरी चराने गये अजीत लोहरा पर भालू ने हमला किया. दोनों घटनाओं में ग्रामीण घायल हुए.
लोहरदगा में अगस्त में पाखरगढ़ा क्षेत्र के रामधन नगरिया पर भालू ने हमला किया था. सितंबर में कुडू के बंदुवा गांव की सुलंती उरांव जंगल में दतवन तोड़ने के दौरान भालू के हमले में घायल हुईं. इस तरह लोहरदगा में भी कम से कम दो घटनाएं सामने आयीं.
बोकारो में दो घटनाएं, एक ग्रामीण की मौत
बोकारो के गोमिया स्थित झुमरा पहाड़ क्षेत्र में जून में भालू के हमले की दो अलग घटनाएं सामने आयीं. पहली घटना में लकड़ी चुनने गये बद्री महतो घायल हुए. इसके कुछ दिन बाद मोढा जंगल में बैल खोजने गये रामगढ़ निवासी एक ग्रामीण की भालू के हमले में मौत हो गयी.
रांची और सरायकेला-खरसावां भी सूची में
रांची जिले में 28 सितंबर को बुंडू क्षेत्र के पुरनाडीह जंगल में बकरी चराने गये डोमन मुंडा पर भालू ने हमला किया. उन्हें गंभीर चोटें आयीं और अस्पताल में इलाज कराया गया. यह घटना 2026 के आंकड़े में रांची को भी शामिल करती है.
वहीं सितंबर में सरायकेला-खरसावां के राजनगर क्षेत्र में 80 वर्षीय मानसिंह हांसदा पर भालू ने हमला किया. घटना में उनके पैर की हड्डी टूटने की जानकारी सामने आयी.
भालू के हमले क्यों बढ़ते हैं?
भालू के हमलों की ज्यादातर घटनाएं जंगल से जुड़े उन इलाकों में सामने आयी हैं, जहां ग्रामीण जंगल से भोजन, लकड़ी या दूसरे वन उत्पाद जुटाने जाते हैं. महुआडांड़ की घटनाओं के संबंध में वन अधिकारियों ने जंगली मशरूम और दूसरे मौसमी वन उत्पाद जुटाने के दौरान जंगल में इंसानों और भालुओं के आमने-सामने आने को एक कारण बताया था. मानसून के दौरान जंगल में लोगों की आवाजाही बढ़ने से भी ऐसी घटनाओं का जोखिम बढ़ सकता है.
झारखंड में भालू का मानव आबादी के साथ टकराव नया नहीं है. एक पूर्व प्रकाशित चिकित्सकीय अध्ययन में भी राज्य के जंगलों के आसपास रहने वाली आबादी में भालू के हमलों से होने वाली चोटों का अध्ययन किया गया था. इसमें रांची, गुमला, लोहरदगा, लातेहार और पश्चिमी सिंहभूम समेत कई जिलों के पीड़ित शामिल थे.



