धनबाद के सीएमपीएफओ में 3.64 करोड़ रुपये का बड़ा पेंशन घोटाला उजागर हुआ है। सीबीआई ने चार कर्मचारियों सहित अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी और पद के दुरुपयोग के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जागरण संवाददाता, धनबाद। कोल माइन्स प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन (सीएमपीएफओ) धनबाद में 3,64,48,052 रुपये का पेंशन घोटाला सामने आया है। मामले को लेकर संस्थान के सीवीओ की ओर से चार कर्मचारियों समेत अन्य के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) धनबाद में प्राथमिकी कराई गई है।
इसमें सीएमपीएफओ धनबाद और ओडिशा के सेक्शन ऑफिसर अचिंत्य कुमार, दीप कुमार, अजय कुमार सिन्हा और वरिष्ठ सामाजिक सुरक्षा सहायक मंजीत कुमार को नामजद आरोपित बनाया गया है। फिलहाल प्राथमिकी दर्ज करने के बाद सीबीआई ने अपनी जांच शुरू कर दी है और प्रारंभिक स्तर पर कागजातों की जांच की जा रही है।
सीबीआई ने बेइमानी, धोखाधड़ी, जाली दस्तावेज बनाना, सरकारी सेवक रहते हुए पद का दुरुपयोग समेत बीएनएस की कुल आठ धाराओं में प्राथमिकी किया है। जिसमें आरोपितों की गिरफ्तारी का प्रविधान है।
चीफ विजिलेंस ऑफिसर (सीवीओ) सीएमपीएफओ की ओर से सीबीआई को दिए गए आवेदन में अचिंत्य कुमार (सेक्शन ऑफिसर), दीप कुमार (सेक्शन ऑफिसर), अजय कुमार सिन्हा (सेक्शन ऑफिसर) और सीएफपीएफ रीजनल ऑफिस धनबाद तीन के मंजीत कुमार (वरिष्ठ सामाजिक सुरक्षा सहायक) ने अन्य के साथ मिलकर उपरोक्त राशि का गलत तरीके से निकासी किया है।
इस निकासी में प्रविधानों का उल्लंघन किया गया। आरोपितों ने मार्च 2016 से लेकर सितंबर 2016 के बीच कुल 142 पेंशन क्लेम का भुगतान फर्जी तरीके से किया। ये सभी डीलिंग असिस्टेंट के तौर पर काम कर रहे थे। इन सभी ने रिकॉर्ड में हेराफेरी भी की। करते हुए, रिकॉर्ड में हेराफेरी की।
उन्होंने CMPFO के तय नियमों का उल्लंघन करते हुए, मार्च 2016 से सितंबर 2016 के बीच जान-बूझकर 142 फर्जी पेंशन क्लेम प्रोसेस किए। इसके कारण मासिक पेंशन के अलावा पेंशन एरियर के तौर पर 3,64,48,052 रुपये का गलत भुगतान हुआ। आरोपितों में सेक्शन ऑफिसर दीप कुमार ओडिशा के तालचेर रीजनल ऑफिस में कार्यरत हैं और शेष धनबाद में पदस्थापित हैं।
ये हैं आरोप और बीएनएस की इन धाराओं में हुई प्राथमिकी
सीबीआई ने बीएनएस की कई महत्वपूर्ण धाराओं के तहत प्राथमिकी की है। इनमें बीएनएस 318 (धोखाधड़ी करना और बेईमानी से संपत्ति सौंपने के लिए प्रेरित करना), 338 (मूल्यवान सुरक्षा, वसीयत या जाली दस्तावेज बनाना), 336 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी करना), 340 (किसी जाली दस्तावेज या इलेक्ट्रानिक रिकॉर्ड को असली के रूप में जानबूझकर इस्तेमाल करना), 61/2) (आपराधिक साजिश रचना।
जब दो या दो से अधिक लोग मिलकर किसी अपराध को अंजाम देने की योजना बनाते हैं), 1988 पीसी एक्ट की धारा 13/1/ए (किसी लोक सेवक द्वारा भ्रष्ट या अवैध तरीकों से अपने पद का दुरुपयोग करके खुद के लिए या किसी अन्य व्यक्ति के लिए कोई मूल्यवान वस्तु या आर्थिक लाभ प्राप्त करना) और धारा 13/2 (यह धारा आपराधिक कदाचार के लिए सजा का प्रावधान करती हैं) लगाई गई हैं।



