सात साल से डीएमडी बीमारी से जूझ रहा मासूम, इलाज के लिए 30 करोड़ रुपये की जरूरत
बोरियो। बोरियो बाजार निवासी मुन्ना रक्षित का 14 वर्षीय पुत्र जीत रक्षित पिछले सात वर्षों से ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी ( डीएमडी ) नामक गंभीर आनुवंशिक बीमारी से जूझ रहा है। बीमारी ने उसकी जिंदगी को बेहद कठिन बना दिया है। जीत को चलने-फिरने, लंबे समय तक बैठने और दैनिक कार्यों के लिए भी पिता का सहारा लेना पड़ता है। जिस उम्र में बच्चे खेलते-कूदते और भविष्य के सपने देखते हैं, उस उम्र में जीत बीमारी से संघर्ष कर रहा है।
इलाज का खर्च जुटाना परिवार के लिए मुश्किल :

पिता मुन्ना रक्षित के अनुसार, वे बेटे के इलाज के लिए रिम्स और एम्स सहित विभिन्न अस्पतालों के चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन अब तक अपेक्षित उपचार नहीं मिल पाया है। उनके मुताबिक, डॉक्टरों ने इलाज का खर्च करीब 30 करोड़ रुपये बताया है। इतनी बड़ी रकम जुटाना परिवार के लिए संभव नहीं है। बेटे के बेहतर इलाज की उम्मीद में मुन्ना रक्षित झारखंड सरकार, सक्षम लोगों और बड़े सेलिब्रिटी से आर्थिक सहायता की अपील कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री के निर्देश से जगी उम्मीद :
जीत के मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संज्ञान लेते हुए सोशल मीडिया पर साहिबगंज के उपायुक्त को उसके इलाज की समुचित व्यवस्था और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री के इस कदम से परिवार को उम्मीद जगी है कि अब जीत के उपचार के लिए जरूरी सहायता मिल सकेगी।
ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी एक गंभीर आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें समय के साथ मांसपेशियां कमजोर होती जाती हैं और शारीरिक गतिविधियां प्रभावित होती हैं। जीत का परिवार अब ऐसे मददगार की आस लगाए बैठा है, जो उसके बेहतर इलाज की राह आसान बनाने में सहयोग कर सके। मुन्ना रक्षित की अपील है कि सक्षम लोग और संबंधित संस्थाएं आगे आएं, ताकि उनके बेटे को आवश्यक चिकित्सा सहायता मिल सके और परिवार की उम्मीद कायम रह सके



