Jamui Pratappur Double Murder : 23 साल पुराने प्रतापपुर दोहरे हत्याकांड के मुख्य आरोपी गनौरी यादव को 23 साल बाद गिरफ्तार कर लिया गया है। हालांकि, इस मामले के तीन अन्य नामजद आरोपी मकेश्वर यादव, महेश यादव और बंदा यादव अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश में पुलिस जुटी है।
जमुई। Jamui Pratappur Double Murder : मड़वा पहाड़ छेड़खानी कांड के मुख्य आरोपित नंदन यादव के पिता गनौरी यादव के 23 साल बाद सलाखों के पीछे पहुंचने से भले ही खाकी ने राहत की सांस ली हो, लेकिन इस कार्रवाई ने जमुई पुलिस के सामने एक बड़ा और गंभीर सवाल भी खड़ा कर दिया है।
सवाल यह कि प्रतापपुर गांव में दो सगे भाइयों (पूना यादव और डीपी) को गोलियों से भूनने वाले अन्य तीन नामजद आरोपित—मकेश्वर यादव उर्फ माको, महेश यादव और बंदा यादव पिछले 23 सालों से कहां छिपे हैं और पुलिस की गिरफ्त से अब तक बाहर क्यों हैं?
जंगलों और दूसरे राज्यों में तलाश
करीब सवा दो दशक पूर्व हुए इस जघन्य दोहरे हत्याकांड में कुल छह लोगों को नामजद किया गया था। इनमें से एक आरोपित दशरथ यादव अदालत से सजा पाकर अपनी मियाद पूरी कर चुका है, जबकि दूसरे आरोपित गुलेश्वर यादव की मौत हो चुकी है। अब गनौरी यादव की गिरफ्तारी के बाद केस के बाकी बचे तीन जीवित आरोपितों की फाइलें पुलिस ने नए सिरे से खोल दी हैं।
23 साल से भूमिगत हैं माको, महेश और बंदा
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि वारदात के बाद से ही मकेश्वर यादव उर्फ माको, महेश यादव और बंदा यादव लगातार अपने ठिकाने बदलते रहे हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि ये आरोपित या तो झारखंड और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती इलाकों में पहचान छिपाकर मजदूरी व अन्य धंधों में लगे हैं, या फिर स्थानीय स्तर पर दबंगों के संरक्षण में भूमिगत जीवन बिता रहे हैं।
प्रतापपुर दोहरा हत्याकांड
- 1. गनौरी यादव: 23 साल बाद गिरफ्तार होकर जेल भेजा गया (बैड टच कांड के मुख्य आरोपित नंदन यादव का पिता)।
- 2. मकेश्वर यादव उर्फ माको: 23 साल से फरार, पुलिस दबिश जारी।
- 3. महेश यादव: 23 साल से फरार, संभावित ठिकानों पर छापेमारी।
- 4. बंदा यादव: 23 साल से फरार, पुलिस रिकॉर्ड खंगाल रही है।
- 5. दशरथ यादव: न्यायालय द्वारा सुनाई गई सजा पूरी कर चुका है।
- 6. गुलेश्वर यादव: पूर्व में ही मृत्यु हो चुकी है।
गनौरी यादव से पुलिस रिमांड या पूछताछ के दौरान मिले सुरागों के आधार पर अब पुलिस की विशेष टीम (SIT) इन तीनों फरार आरोपितों के वर्तमान ठिकानों, मोबाइल लोकेशन (यदि सक्रिय हो) और परिजनों के संपर्कों को खंगालने में जुट गई है।
‘जब तक तीनों नहीं पकड़े जाते, पूरा नहीं होगा इंसाफ’
इधर, 23 साल बाद एक हत्यारे के पकड़े जाने पर मृतक भाइयों की वृद्ध मां संसार देवी के दिल को तसल्ली तो मिली है, लेकिन उनकी आंखों का दर्द अब भी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। संसार देवी का कहना है कि उनके घर के दरवाजे पर दोनों बेटों को घेरकर छह लोगों ने गोलियों से छलनी किया था।
रोते हुए बोलीं मां
उन्होंने हाथ जोड़कर जिला प्रशासन और पुलिस कप्तान से गुहार लगाई है कि जिस तरह 23 साल बाद गनौरी यादव को खोज निकाला गया, उसी तरह माको, महेश और बंदा यादव को भी जल्द से जल्द पकड़कर जेल भेजा जाए। जब तक ये तीनों सलाखों के पीछे नहीं पहुंचेंगे, तब तक उनके बेकसूर बेटों की आत्मा को पूर्ण शांति और परिवार को मुकम्मल इंसाफ नहीं मिल सकेगा।



