किसान प्रबंधित प्राकृतिक पुनर्जनन तकनीक से जंगल के प्राकृतिक पौधों और नई कोंपलों का संरक्षण
बोरियो। प्रखंड के पोखरिया गांव में एफिकोर की पुनर्निर्माण परियोजना के तहत किसान प्रबंधित प्राकृतिक पुनर्जनन तकनीक के माध्यम से प्राकृतिक वन क्षेत्र के संरक्षण एवं पुनर्जीवन की पहल की जा रही है। इस पहल से जहां वन क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से उगने वाले पौधों के संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं ग्रामीणों में जंगल और प्राकृतिक संसाधनों के प्रति सामुदायिक जिम्मेदारी भी मजबूत हो रही है।
किसान प्रबंधित प्राकृतिक पुनर्जनन एक सरल और कम लागत वाली तकनीक है। इसमें जंगल और भूमि में पहले से मौजूद पेड़ों की जड़ों, ठूंठ, प्राकृतिक पौधों और नई कोंपलों को सुरक्षित रखते हुए उनका उचित प्रबंधन किया जाता है। इससे प्राकृतिक रूप से उगने वाली वनस्पतियों को संरक्षण देकर धीरे-धीरे वन क्षेत्र को फिर से हरा-भरा बनाया जा सकता है।

प्रशिक्षण के बाद ग्रामीण खुद कर रहे जंगल की निगरानी:
पुनर्निर्माण परियोजना के तहत पोखरिया के ग्रामीणों को इस तकनीक की जानकारी एवं प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद ग्रामीण जंगल में मौजूद प्राकृतिक पौधों एवं पेड़ों की सुरक्षा, अनावश्यक शाखाओं की छंटाई तथा नई कोंपलों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। इससे प्राकृतिक पुनर्जनन को बढ़ावा मिल रहा है।
परियोजना समन्वयक विजय मेशाक बोडकिलवार ने बताया कि पहल का उद्देश्य स्थानीय समुदाय की भागीदारी से प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और सतत प्रबंधन सुनिश्चित करना है। परियोजना वर्तमान में प्रखंड के 43 गांवों में समुदाय के साथ मिलकर काम कर रही है। इसके तहत खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, कृषि, आजीविका, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में ग्रामीणों को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशिक्षण के बाद जंगल को साझा प्राकृतिक संपदा मानकर उसकी सुरक्षा के प्रति जिम्मेदारी बढ़ी है। पोखरिया में मिल रहे सकारात्मक परिणाम आने वाले समय में क्षेत्र के अन्य गांवों के लिए भी प्राकृतिक वन संरक्षण का प्रेरणादायक मॉडल बन सकते हैं।



