झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस के दारोगाओं की प्रोन्नति और वरीयता सूची से जुड़े मामले पर अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने फिलहाल प्रमोशन प्रक्रिया पर लगी रोक हटाने से इनकार कर दिया है. अगली सुनवाई 14 सितंबर 2026 को होगी
रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य पुलिस के अवर निरीक्षकों (Sub-Inspectors) की प्रोन्नति (Promotion) और वरीयता (Seniority) सूची से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले पर सुनवाई की है. सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने प्रार्थियों और विरोधी पक्ष दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं. मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने प्रोन्नति प्रक्रिया पर 13 मई 2026 को लगाई गई रोक (Stay) को हटाने के राज्य सरकार के आग्रह को फिलहाल नामंजूर कर दिया और उसमें कोई हस्तक्षेप करने से मना कर दिया. अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख 14 सितंबर 2026 निर्धारित की है.
जानिए क्या है पूरा वरीयता विवाद?
यह पूरा कानूनी विवाद वर्ष 2017 में निकाली गई दारोगा बहाली प्रक्रिया और उसके बाद पुलिस विभाग द्वारा तैयार की गई वरीयता सूची से जुड़ा हुआ है. वर्ष 2017 में दारोगा बहाली के लिए दो अलग-अलग विज्ञापन जारी किए गए थे. इसके तहत विज्ञापन संख्या 05/2017 के तहत सीधी भर्ती की गई थी, जबकि विज्ञापन संख्या 09/2017 के तहत सीमित विभागीय परीक्षा के माध्यम से नियुक्ति हुई थी.
प्रार्थियों ने क्या दी दलील
याचिकाकर्ता उत्तम तिवारी व अन्य की ओर से अदालत में पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज टंडन ने पक्ष रखा. प्रार्थियों का मुख्य तर्क यह है कि सीधी भर्ती वाला विज्ञापन पहले आया था, इसलिए सीधी बहाली से आए दारोगाओं को वरीयता सूची में विभागीय परीक्षा से बने दारोगाओं से ऊपर रखा जाना चाहिए. हालांकि, विभाग ने इसके विपरीत सीमित बैच वाले दारोगाओं को वरीयता सूची में आगे रख दिया, जिसे चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय में याचिकाएं दायर की गई हैं.



