JPSC, JSSC CGL, CDPO परीक्षाएं रद्द होने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है. सरकार ने बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों और मनी ट्रेल के पुख्ता सबूत पेश कर फैसले का बचाव किया.
रांची : जेपीएससी (JPSC 11वीं-13वीं), जेएसएससी सीजीएल (JSSC CGL 2023), सीडीपीओ (CDPO) और फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा रद्द किए जाने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार को भी सुनवाई चल रही है. राज्य सरकार की ओर से पैरवी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा अदालत में मौजूद हैं. सुनवाई के दौरान सरकार ने परीक्षा रद्द करने के फैसले का बचाव करते हुए कोर्ट में कहा कि इन परीक्षाओं में बेहद बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं. सीआईडी (CID) की जांच काफी आगे बढ़ चुकी है और अनुसंधान के दौरान ‘मनी ट्रेल’ (पैसे के लेन-देन) के पुख्ता प्रमाण सामने आए हैं.कल अदालत ने जताई थी सख्त नाराजगी- “बिना CID रिपोर्ट परीक्षा रद्द क्यों की?”
इससे पहले बुधवार (7 अक्टूबर) को जस्टिस दीपक रोशन की पीठ में साढ़े तीन घंटे तक बहस हुई थी. कल की सुनवाई में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर तल्ख टिप्पणी करते हुए पूछा था कि जब सीआईडी जांच अभी पूरी ही नहीं हुई है, तो पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करने का आधार क्या था? कोर्ट ने कहा था कि ऐसा लगता है मानो यह फैसला किसी ‘दबाव’ में आकर लिया गया है. अदालत ने सीआईडी जांच की धीमी रफ्तार पर सवाल उठाते हुए कहा था कि ढाई साल से जांच चल रही है और राज्य को लंबे समय तक अधिकारियों के बिना नहीं छोड़ा जा सकता.
‘2500 मेरिट वाले सफल अभ्यर्थियों के साथ न्याय जरूरी, सबको गलत ठहराना सही नहीं’
अदालत ने बुधवार को सुनवाई के दौरान स्पष्ट शब्दों में कहा था कि मेरिट के आधार पर चयनित होकर आए 2500 सफल अभ्यर्थियों के साथ न्याय होना आवश्यक है और उन्हें बिना किसी गलती के नुकसान नहीं होना चाहिए. केवल व्यापक धांधली या ‘सिस्टमैटिक फेलियर’ का हवाला देकर सभी अभ्यर्थियों को कटघरे में खड़ा नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि केवल सीलबंद लिफाफे में दी गई रिपोर्ट के आधार पर पूरे विज्ञापन और परीक्षा को रद्द करना न्यायसंगत नहीं है. आज की सुनवाई में सरकार द्वारा दिए जा रहे ‘मनी ट्रेल’ के तर्कों पर अदालत के अंतिम रुख का सभी को इंतजार है.



