CM हेमंत सोरेन ने अपनी मां रूपी सोरेन को नम आंखों से अंतिम विदाई दी. नेमरा में पंचतत्व में विलीन हुईं रूपी सोरेन. परिवार और समर्थकों में शोक की लहर.
रांची/नेमरा: मां की गोद से बड़ा इस दुनिया में शायद ही कोई सहारा होता है. मां का जाना उस खालीपन को छोड़ जाता है, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल होता है। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुरुवार को अपनी मां रूपी सोरेन को नम आंखों से अंतिम विदाई दी. नेमरा में अंतिम संस्कार के दौरान मुख्यमंत्री कई बार अपनी आंखों से आंसू पोंछते नजर आए. मां को खोने का दर्द उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था.
रांची से रूपी सोरेन का पार्थिव शरीर पैतृक गांव नेमरा पहुंचा. पैतृक आवास के आंगन में परिवार और समाज की परंपरा व संस्कृति के अनुसार अंतिम रस्में पूरी की गयीं. इसके बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत परिवार के सदस्यों ने पार्थिव शरीर को कंधा दिया और श्मशान घाट की ओर रवाना हुए. जहां गुरुजी हुए थे पंचतत्व में विलीन, वहीं मां को दी अंतिम विदाई
रूपी सोरेन का अंतिम संस्कार उसी स्थान पर किया गया, जहां करीब एक साल पहले उनके पति और झारखंड आंदोलन के महानायक शिबू सोरेन यानी गुरुजी का अंतिम संस्कार हुआ था. उसी घाट पर आज परिवार ने रूपी सोरेन को भी अंतिम विदाई दी. इस दौरान हेमंत सोरेन, उनके दोनों बेटे समेत परिवार के अन्य सदस्यों ने पार्थिव शरीर को कंधा दिया. अंतिम विदाई के वक्त पूरा परिवार भावुक था. नेमरा में मौजूद लोगों की आंखें भी नम थीं. मां ही नहीं, परिवार की मजबूत गार्जियन थीं रूपी सोरेन
रूपी सोरेन को याद करते हुए उनके भाई लक्ष्मण भावुक हो गए. उन्होंने कहा कि रूपी दीदी उन्हें बहुत मानती थीं. जीवन के आखिरी वक्त में उनसे मुलाकात नहीं हो पाने का अफसोस उन्हें हमेशा रहेगा. परिवार की एक भतीजी ने रूपी सोरेन को याद करते हुए कहा कि उनके लिए रूपी सोरेन सिर्फ चाची नहीं थीं, बल्कि मां की तरह थीं. उन्होंने कहा कि बचपन से ही रूपी सोरेन ने परिवार के बच्चों की परवरिश में बड़ी भूमिका निभाई. दिल्ली से लेकर रांची तक, जहां भी रहीं, परिवार के बच्चों को अपने साथ रखा और उनकी जरूरतों का ख्याल रखा. उन्होंने भावुक होकर कहा कि अब घर से एक बड़ा गार्जियन चला गया है. उनके जाने का दुख शायद कभी खत्म नहीं हो पाएगा.

अंतिम विदाई में सत्ता और विपक्ष, सभी साथ खड़े दिखे
रूपी सोरेन की अंतिम यात्रा और अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में आम लोग, नेता, मंत्री, विधायक और अधिकारी मौजूद रहे. मुख्यमंत्री के दुख की घड़ी में सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष के नेता भी उनके साथ खड़े नजर आए. राज्य सरकार के मंत्री संजय प्रसाद यादव, योगेंद्र प्रसाद, चमरा लिंडा, हफीजुल हसन, दीपक बिरुआ और शिल्पी नेहा तिर्की समेत कई नेता मौजूद रहे. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी भी अंतिम संस्कार के वक्त घाट पर मौजूद रहे. राज्य के मुख्य सचिव अविनाश कुमार और डीजीपी तदाशा मिश्रा समेत कई आईएएस और आईपीएस अधिकारी भी नेमरा पहुंचे.

रातभर रांची में अंतिम दर्शन, फिर नेमरा ले जाया गया पार्थिव शरीर
बता दें कि रूपी सोरेन का बुधवार देर शाम राजधानी रांची के रेलवे अस्पताल में निधन हो गया था. इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को शिबू सोरेन आवास लाया गया. रातभर पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए रखा गया. गुरुवार सुबह करीब 9 बजे तक आम लोगों को भी अंतिम दर्शन का अवसर मिला. इसके बाद करीब 11 बजे पार्थिव शरीर को शिबू सोरेन आवास से पैतृक गांव नेमरा ले जाया गया. यहां परिवार और समाज की परंपराओं के अनुसार अंतिम रस्में पूरी की गयीं. इसके बाद रूपी सोरेन का अंतिम संस्कार किया गया और वह पंचतत्व में विलीन हो गयीं.

समर्थकों में शोक की लहर
रूपी सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा की केंद्रीय उपाध्यक्ष भी थीं. उनके निधन से सोरेन परिवार के साथ-साथ झामुमो कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भी शोक की लहर है. आज नेमरा में सिर्फ एक परिवार अपनी मां को नहीं खो रहा था, बल्कि एक ऐसी महिला को अंतिम विदाई दी जा रही थी, जो अपने परिवार के लिए मां, बहन, चाची और मजबूत सहारे की तरह थीं.



