बरहरवा में 1008 कन्याओं की भव्य कलश यात्रा के साथ मां बड़ी काली की चार दिवसीय पूजा शुरू हो गई है। 180 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के तहत 9 नवंबर तक विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
बरहरवा. नगर पंचायत क्षेत्र के कालीतल्ला स्थित सार्वजनिक श्री श्री बड़ी काली मंदिर में शुक्रवार से चार दिवसीय वार्षिक काली पूजा उत्सव शुरू हो गया. पहले दिन 1008 कुमारी कन्याओं ने भव्य कलश शोभायात्रा निकाली. इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच मां काली का अभिषेक, श्रृंगार और आरती की गयी.
180 वर्षों से चली आ रही पूजा की परंपरा
मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष पंचू सिंह ने बताया कि मंदिर में करीब 180 वर्षों से मां काली की पूजा-अर्चना की परंपरा चली आ रही है. शुक्रवार सुबह नौ बजे मंदिर परिसर से कलश शोभायात्रा निकाली गयी. इसके बाद पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध शक्तिपीठ तारापीठ से पहुंचे पुरोहित तांत्रिक पुटू बाबा और दक्षिणेश्वर से पहुंचे पुरोहित तरुण बाबा सहित अन्य पुरोहितों एवं तांत्रिकों के सानिध्य में विधि-विधान से पूजन, हवन और महाआरती की गयी. इसके बाद प्रसाद वितरण हुआ.
छह से नौ नवंबर तक होंगे धार्मिक अनुष्ठान
समिति के महासचिव अमन राय ने बताया कि छह से नौ नवंबर तक मंदिर परिसर में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित होंगे. सात नवंबर को सुबह 11 बजे रुद्राभिषेक एवं पूजन होगा. शाम सात बजे स्थानीय बच्चों और कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया जायेगा.
आठ नवंबर को मध्य रात्रि 12:05 बजे वार्षिक काली पूजा शुरू होगी. नौ नवंबर को शाम छह बजे महाआरती और महाप्रसाद वितरण के साथ उत्सव का समापन होगा.
फूलों और रोशनी से सजा मंदिर, लगा मेला
उत्सव को लेकर मंदिर को गेंदे के फूलों और आकर्षक विद्युत सज्जा से सजाया गया है. परिसर में मेले का भी आयोजन किया गया है. यहां झूला, नौका, मिकी माउस, जंपिंग सहित विभिन्न खेल-तमाशे और खिलौनों की दुकानें आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं.
आयोजन को सफल बनाने में आकाश भास्कर, दुलाल साह, पिया शाह, सिंटू शाह, विनोद भास्कर, राकेश भास्कर, राजेश भास्कर, रोनित दास, विनीत दास, राजा चौधरी, सौरभ चौधरी, रॉकी रामानी, स्वरूप सिंह सहित समिति के सभी सदस्य जुटे हुए हैं.



