एक बुजुर्ग तीर्थ यात्रा के दौरान अमृतसर से बिहार पहुंच गए और अपने परिवार से बिछड़ गए। बिहार के एक युवक नीरज कुमार ने AI की मदद से उनका गाँव ढूंढा और उन्हें लुधियाना में उनके पोते से मिलवाया।
श्री माछीवाड़ा साहिब (लुधियाना)। नजदीकी गांव फतेहगढ़ गुजरां के बुजुर्ग चमन लाल जो 11 सितंबर को मुख्यमंत्री तीर्थ योजना के तहत श्री हरमंदिर साहिब (अमृतसर साहिब) की यात्रा पर गया था। वहां वह जत्थे से बिछड़ गया और गलती से बिहार जाने वाली ट्रेन में बैठ गया। इसके बाद वह बिहार के गया जिले में पहुंच गया।
मानसिक रूप से अस्वस्थ चमन लाल को एक 19 वर्षीय युवक नीरज कुमार मिला, जिसने न केवल उनकी सेवा की, बल्कि एआई और अन्य तकनीक की मदद से उनके गांव का पता लगाकर उसे परिवार से मिलाने में अहम भूमिका निभाई। चमन लाल के पोते सुखचैन सिंह ने बताया कि हरमंदिर साहिब की यात्रा के दौरान उनके दादा वापस घर नहीं लौटे। परिवार की ओर से पिछले कई दिनों से उनकी तलाश की जा रही थी।
चमन लाल गलती से अमृतसर साहिब से बिहार जाने वाली ट्रेन में सवार हो गए और गया जिले में पहुंच गए। उनकी तलाश के लिए सोशल मीडिया पर भी तस्वीर साझा की गई थी और पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई गई थी। चमन लाल की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। बिहार में भटकते हुए उन्हें नीरज नामक एक युवक मिला। नीरज उन्हें अपने घर ले गया, जहां उन्हें खाना-पानी दिया और उनकी सेवा की।
एआई से मिली लोकेशन
मानसिक स्थिति ठीक न होने के कारण चमन लाल नीरज को केवल इतना बता पाए कि वह गांव फतेहगढ़ गुजरां के रहने वाले हैं। बिहार के गया जिले के रहने वाले नीरज कुमार ने लगातार चार दिन तक गूगल और अन्य एआई तकनीक की मदद से फतेहगढ़ गुजरां गांव की लोकेशन तलाश की। आखिरकार उसे पता चला कि यह गांव लुधियाना जिले में माछीवाड़ा साहिब के नजदीक स्थित है।
नीरज कुमार ने इंसानियत का परिचय देते हुए बुजुर्ग चमन लाल को अपने साथ लिया और ट्रेन से लुधियाना पहुंचा। इसके बाद वह उन्हें माछीवाड़ा साहिब लेकर आया। यहां नीरज ने स्थानीय लोगों को चमन लाल की तस्वीर दिखाकर उनके गांव और परिवार का पता लगाने का प्रयास किया।
नीरज ने पेश की मिसाल
माछीवाड़ा में मास्टर कृष्ण लाल ने बुजुर्ग को पहचान लिया और बताया कि यह चमन लाल हैं, जो तीर्थ यात्रा के दौरान लापता हो गए थे। इसके बाद तुरंत फतेहगढ़ गुजरां में उनके परिवार को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही पोता सुखचैन सिंह अपने दादा को लेने के लिए पहुंचा। नीरज कुमार की इंसानियत और समाजसेवा की इस मिसाल की हर कोई प्रशंसा कर रहा था।
पोते ने 19 वर्षीय नीरज के पैर छूकर जताया आभार
लापता हुए दादा चमन लाल को सामने देखकर पोता सुखचैन सिंह भावुक हो गया। उसने अपने दादा को गले से लगा लिया और उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े। इसके बाद सुखचैन सिंह ने बिहार के गया जिले से आए 19 वर्षीय नीरज कुमार के पैर छूकर उसका धन्यवाद किया।
सुखचैन ने कहा कि नीरज के प्रयास और निस्वार्थ सेवा के कारण ही उसके दादा आज दोबारा अपने परिवार के बीच लौट पाए हैं। चमन लाल का परिवार नीरज कुमार को अपने घर ले गया, जहां उसकी पूरी खातिरदारी की गई और परिवार की ओर से उसका कोटि-कोटि धन्यवाद किया गया।



