मुराइडीह की 41वीं दुर्गापूजा चर्च की तर्ज पर 71 फीट ऊंचे भव्य पंडाल में सजेगी. 1985 से यह परंपरा आस्था का केंद्र बनी हुई है, जहाँ श्रद्धालु भारी संख्या में भाग लेते हैं.
बाघमारा. बाघमारा कोयलांचल की मुराइडीह श्रमिक कॉलोनी में दुर्गापूजा चार दशक से अधिक समय से आस्था और परंपरा का केंद्र बनी हुई है. वर्ष 1985 में कॉलोनी के निर्माण के बाद शुरू हुई पूजा इस बार अपने 41वें वर्ष में पहुंच गयी है. वैष्णवी परंपरा के अनुसार होने वाली इस पूजा में हर साल श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी रहती है. इस बार पूजा पंडाल को चर्चित यूरोपीय चर्च की तर्ज पर तैयार किया जा रहा है. इसकी ऊंचाई 71 फीट और चौड़ाई 65 फीट होगी. आकर्षक पंडाल के साथ रंग-बिरंगी रोशनी, मेला और सांस्कृतिक कार्यक्रम श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेंगे.
स्थायी प्रतिमा है पूजा की खास पहचान
मुराइडीह दुर्गापूजा की सबसे बड़ी विशेषता मंदिर में स्थापित स्थायी प्रतिमा है. वर्ष 2005 में तत्कालीन थानेदार राजकुमार यादव और नित्यानंद महतो के प्रयास से अष्टभुजी मां दुर्गा के साथ भगवान गणेश, कार्तिकेय, मां लक्ष्मी और मां सरस्वती की प्रतिमाएं स्थापित कर प्राण-प्रतिष्ठा की गयी थी.
पूजा के दौरान हर वर्ष मां दुर्गा समेत अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित की जाती हैं. पंडाल की सजावट और पूजा आयोजन को लेकर समिति की ओर से विशेष तैयारी की जाती है. मुराइडीह की इस पूजा को लायंस क्लब बाघमारा और बरोरा पुलिस जनसहयोग समिति की ओर से कई बार पुरस्कार भी मिल चुका है.
चर्च की तर्ज पर तैयार हो रहा पंडाल
इस वर्ष पूजा पंडाल को यूरोपीय चर्च की तर्ज पर तैयार किया जा रहा है. 71 फीट ऊंचे और 65 फीट चौड़े पंडाल को आकर्षक रूप देने के लिए समिति के सदस्य जुटे हैं. पंडाल के साथ रंग-बिरंगी रोशनी और मेले की व्यवस्था भी श्रद्धालुओं के आकर्षण को बढ़ाएगी. पूजा के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जायेगा.
आयोजन की तैयारी में जुटे समिति के सदस्य
दुर्गापूजा को सफल बनाने के लिए समिति के सदस्य तैयारियों में सक्रिय हैं. इनमें देवानंद राजभर, नवीन सिंह, शशि यादव, सुरेश साव, रंधीर झा, संतोष चौहान, संदीप गांधी, संतोष पेंटर, चंदन यादव, संतोष विश्वकर्मा, जितेंद्र सिंह, संजय चौहान, संजय कुमार, सुजीत चौहान और रामनाथ मांझी समेत अन्य सदस्य शामिल हैं. समिति के सदस्य पूजा की व्यवस्था, पंडाल निर्माण और श्रद्धालुओं की सुविधा से जुड़े कार्यों में जुटे हुए हैं.



