रांची की विवादित जमीन पर 12 साल पुराने मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने शबाना खातून की याचिका खारिज की। स्कूल पक्ष को मुकदमे में शामिल रखने का आदेश दिया।
Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के कांटाटोली स्थित एक विवादित जमीन से जुड़े 12 साल पुराने मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए शबाना खातून की याचिका खारिज कर दी है. अदालत ने स्पष्ट किया कि जिस जमीन पर स्वामित्व को लेकर विवाद है और जहां उर्दू स्कूल के संचालन का दावा भी किया जा रहा है, वहां स्कूल पक्ष को मुकदमे से बाहर नहीं रखा जा सकता. न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने 21 सितंबर 2026 को यह फैसला सुनाया.
2014 में दाखिल हुई थी याचिका
यह मामला वर्ष 2014 में दायर डब्ल्यूपी (सी) संख्या 2328/2014 से जुड़ा है. शबाना खातून ने निचली अदालत के 24 फरवरी 2014 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें पब्लिक उर्दू मिडिल स्कूल, कांटाटोली के अध्यक्ष मोहम्मद साबिर को टाइटल सूट संख्या 173/2011 में हस्तक्षेपकर्ता के रूप में शामिल करने की अनुमति दी गई थी. याचिकाकर्ता का कहना था कि स्कूल अध्यक्ष का विवादित संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं है, इसलिए उन्हें पक्षकार नहीं बनाया जाना चाहिए.
जमीन पर स्वामित्व का दावा
याचिकाकर्ता ने अदालत में कहा कि उन्होंने यह जमीन वर्ष 1995 में पंजीकृत बिक्री विलेख के जरिए खरीदी थी. उनके अनुसार जमीन का म्यूटेशन उनके नाम पर हुआ और वे नियमित रूप से लगान तथा नगर निगम कर का भुगतान करती रही हैं. उन्होंने यह भी बताया कि इस संपत्ति का स्वामित्व पहले अन्य व्यक्तियों के पास था और विधिवत बिक्री के बाद यह उनके हिस्से में आई.
नगर निगम के दस्तावेज बने अहम
दूसरी ओर रांची नगर निगम की ओर से पेश दस्तावेजों में दावा किया गया कि एमएस प्लॉट संख्या 375 निगम की संपत्ति है. रिकॉर्ड में ऐसे पत्र भी पेश किए गए, जिनमें संबंधित होल्डिंग रद्द करने, म्यूटेशन निरस्त करने और निर्माण कार्य रोकने की बात दर्ज थी. एक अन्य दस्तावेज में यह उल्लेख था कि इसी प्लॉट पर उर्दू स्कूल संचालित है और यह भूमि नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आती है.
कोर्ट ने क्या कहा
हाईकोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया रिकॉर्ड से यह स्पष्ट होता है कि विवादित प्लॉट को लेकर अलग-अलग दावे मौजूद हैं. एक पक्ष मकान और निजी स्वामित्व का दावा कर रहा है, जबकि दूसरा पक्ष उसी प्लॉट के हिस्से पर स्कूल चलने की बात कह रहा है. ऐसी स्थिति में स्कूल पक्ष की मौजूदगी मुकदमे के प्रभावी और पूर्ण निपटारे के लिए जरूरी है.
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के विदुर इम्पेक्स एंड ट्रेडर्स बनाम तोश अपार्टमेंट्स फैसले का हवाला देते हुए कहा कि जहां किसी व्यक्ति की मौजूदगी से विवाद का समग्र समाधान संभव हो, वहां उसे उचित पक्षकार बनाया जा सकता है. हाईकोर्ट ने माना कि निचली अदालत ने हस्तक्षेप याचिका स्वीकार कर कोई कानूनी त्रुटि नहीं की.
अब निचली अदालत करेगी अंतिम फैसला
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि विवादित जमीन का कौन सा हिस्सा किसके कब्जे में है और स्कूल वास्तव में किस स्थान पर संचालित हो रहा है, इसका अंतिम निर्णय साक्ष्यों के आधार पर लंबित टाइटल सूट में होगा. इसी आधार पर अदालत ने याचिका खारिज करते हुए पहले दिया गया अंतरिम आदेश भी समाप्त कर दिया और सभी पक्षों को निचली अदालत में उपस्थित होकर मुकदमे की सुनवाई आगे बढ़ाने की स्वतंत्रता दे दी.



