बांका जिले में आदिवासी बच्चों की शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए 14 करोड़ रुपये की लागत से पांच नए छात्रावासों के निर्माण को मंजूरी मिली है।
बांका। आदिवासी बच्चों की शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए जिले में पांच नए छात्रावासों के निर्माण की स्वीकृति मिल गई है।
छात्रावासों के निर्माण के बाद कक्षा नौवीं से 12वीं तक के छात्र-छात्राओं को आवासीय सुविधा उपलब्ध होगी। इससे विशेष रूप से सुदूर एवं आदिवासी बहुल क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों को पढ़ाई जारी रखने में सहूलियत मिलेगी।
वर्तमान में जिले में आदिवासी बच्चों की पढ़ाई के लिए अलग से पर्याप्त छात्रावास की सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसका निर्माण बिहार आधारभूत संरचना निगम को करना है तथा इसके संचालन का जिम्मा शिक्षा विभाग के पास रहेगा।
जानकारी के अनुसार जिले के कटोरिया, चांदन और बौंसी प्रखंड के आदिवासी बहुल इलाकों में इन छात्रावासों का निर्माण कराया जाएगा। ये क्षेत्र जंगल और पहाड़ी भू-भाग से घिरे हैं।
ऐसे में दूर-दराज के गांवों से विद्यालय आने वाले विद्यार्थियों को आवासीय सुविधा मिलने से उनकी पढ़ाई नियमित होने की उम्मीद है। छात्रावास में रहने की सुविधा मिलने के कारण बच्चों को प्रतिदिन लंबी दूरी तय करने की परेशानी से भी राहत मिलेगी।
योजना के तहत कटोरिया में मोचनमा और केरवार हाईस्कूल में छात्रावास का निर्माण प्रस्तावित है। चांदन प्रखंड के यूएचएस फुलहरा और यूएचएस असूढ़ा मुकुंदा विद्यालय परिसर में छात्रावास बनाया जाएगा।
वहीं, बौंसी प्रखंड के सरौनी मध्य विद्यालय में पांचवां छात्रावास बनाने की योजना है। सभी छात्रावास निर्माण के लिए टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है।
छात्रावासों के निर्माण से आदिवासी बहुल क्षेत्रों में माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक स्तर की शिक्षा को बढ़ावा मिलने की संभावना है। आवासीय सुविधा उपलब्ध होने पर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी आगे की पढ़ाई जारी रखने का अवसर मिलेगा।
विभाग की योजना के अनुसार निर्माण कार्य पूरा होने के बाद छात्र-छात्राओं को रहने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे विद्यालयों में विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति और शिक्षा के प्रति उनकी निरंतरता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
आदिवासी बहुल पांच स्कूल परिसर में छात्रावास बनाने का प्रस्ताव भेजा गया था। बिहार आधारभूत संरचना निगम लिमिटेड के पास टेंडर की प्रक्रिया पूरी होने की जानकारी आई है। पांच नया छात्रावास आदिवासी बच्चों की शिक्षा में मील का पत्थर साबित होगा। -देवनारायण पंडित, जिला शिक्षा पदाधिकारी



