रांची। झारखंड में कांग्रेस पार्टी के पास अलग राज्य बनने के बाद से अब तक के चुनावों में फिलहाल सर्वाधिक 17 विधायक हैं, हालांकि पूर्व में भी एक बार कांग्रेस के नाम पर इतने ही विधायक विधानसभा पहुंच चुके हैं।
इसके अलावा कांग्रेस के पास दो लोकसभा सीटें भी हैं। एक लोहरदगा और दूसरी सीट है खूंटी। हाल के वर्षों में खूंटी की जीत कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी जीत मानी जाएगी। पार्टी के हिस्से में दशकों के बाद यह सीट आई है। पिछले तीन दशकों से सिर्फ एक बार छोड़कर भाजपा ने इस सीट को अपना गढ़ बना रखा था।
विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें कांग्रेस के लिए यहां मिली जीत इसी कारण से महत्वपूर्ण हो जाती है। कांग्रेस पार्टी यहां के बाद अब आदिवासी बहुल अन्य क्षेत्रों में भी अपना दबदबा बनाने की तैयारियों में जुटी है। इसका मजबूत हथियार पेसा कानून को मानकर पार्टी काम कर रही है और झारखंड के आदिवासी क्षेत्रों से लोगों को खूंटी में जुटा रही है। इन लोगों में आदिवासी समाज के अगुवा और राजनीतिक तौर पर सक्रिय लोगों को पार्टी राहुल गांधी से मिलवाएगी ताकि पूरे प्रदेश में एक बेहतर संदेश जा सके। इसी संदेश के माध्यम से झारखंड के आदिवासी बहुल इलाकों में कांग्रेस वापसी करना चाहती है।
राहुल गांधी से मुलाकात के दौरान झारखंड में पेसा एक्ट को लेकर विस्तार से चर्चा होनी है। राजीव गांधी के समय में यह कानून बनने और फिर अब इसके लागू होने को लेकर कांग्रेस अपनी पीठ थपथपा रही है।
पार्टी की ओर से पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और वर्तमान में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आदिवासी संगठनों के साथ बैठक कर इस आदिवासी मतों को कांग्रेस के पक्ष में करने की रणनीति को धार देंगे।
इसके लिए प्रदेश संगठन को रणनीति बनाने का निर्देश दे दिया गया है। झारखंड में इस कानून के जानकार कांग्रेस के तमाम आदिवासी नेताओं को इसके लिए सक्रिय किया जा रहा है।
पेसा के माध्यम से ग्राम सभा में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने पर फोकस किया जा रहा है। देश में ग्राम सभाओं को मजबूती प्रदान करना राजीव गांधी का सपना था। इसको कांग्रेस लेकर आगे बढ़ रही है और अच्छी बात यह है कि गठबंधन में इसे सभी का साथ मिल रहा है।



