सदर अस्पताल में डॉक्टर के समय पर नहीं मिलने पर भड़के सिविल सर्जन
निजी क्लीनिक में मरीज मिले, अल्ट्रासाउंड और फार्मेसी भी मिले खुले, डॉ॰ देवेश
अपने आवास में थे: सीएस
साहिबगंज। जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के बीच शनिवार को स्वास्थ्य विभाग ने शहर के चर्चित तेजस्विनी हॉस्पिटल का औचक निरीक्षण किया। सिविल सर्जन डॉ. रामदेव पासवान के नेतृत्व में पहुंची टीम ने अस्पताल परिसर में संचालित क्लीनिक, फार्मेसी और अल्ट्रासाउंड सेंटर का जायजा लिया। सिविल सर्जन के अनुसार, निरीक्षण के दौरान क्लीनिक में मरीज डॉक्टर के इंतजार में बैठे मिले, जबकि डॉक्टर के अस्पताल में मौजूद नहीं होने की बात सामने आई। कर्मचारियों ने बताया कि डॉक्टर ऊपर स्थित आवास में हैं।
सदर अस्पताल में डॉक्टर नहीं मिलीं तो गठित की जांच टीम:

सिविल सर्जन डॉ. रामदेव पासवान ने बताया कि उन्हें सदर अस्पताल में डॉक्टरों के समय पर ओपीडी में नहीं मिलने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। शनिवार को सुबह करीब 10 बजे तक संबंधित डॉक्टर के ओपीडी में नहीं मिलने के बाद उन्होंने मामले को गंभीरता से लिया और जांच टीम गठित कर निजी अस्पताल का निरीक्षण कराया। टीम में डीएलओ सह आरसीएचओ डॉ. किरण माला तथा पुलिस के जवान भी शामिल थे।
एक ही परिसर में क्लीनिक, फार्मेसी और अल्ट्रासाउंड सेंटर:
टीम के तेजस्विनी हॉस्पिटल पहुंचने पर अस्पताल परिसर में फार्मेसी और अल्ट्रासाउंड सेंटर खुले मिले। क्लीनिक में मरीज डॉक्टर के इंतजार में बैठे थे। सिविल सर्जन के मुताबिक, पूछताछ में कर्मचारियों ने डॉक्टर के ऊपर आवास में होने की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डॉक्टर का आवास, क्लीनिक, अस्पताल और फार्मेसी एक ही परिसर में संचालित हो रहे हैं।
सिविल सर्जन ने कहा- कार्रवाई पहले होनी चाहिए थी: सीएस
मीडिया से बातचीत में सिविल सर्जन ने सदर अस्पताल की व्यवस्था पर नाराजगी जताते हुए कहा कि डॉक्टरों की उपलब्धता और ड्यूटी व्यवस्था की गंभीरता से समीक्षा जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार डॉक्टरों को छह घंटे काम करने का भुगतान करती है, इसलिए सभी को अपनी जिम्मेदारी के प्रति जवाबदेह होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि रात में गायनेकोलॉजिस्ट की उपलब्धता समेत कई समस्याएं लंबे समय से सामने आ रही हैं।
सिविल सर्जन ने कहा कि निरीक्षण में सामने आए तथ्यों की रिपोर्ट तैयार कर उपायुक्त सहित राज्य स्वास्थ्य विभाग के वरीय अधिकारियों को भेज दी गई है। आगे की कार्रवाई उच्च स्तर से तय होगी।
डीएस ने आरोप को नकारे:
वहीं, डीएस डॉ॰ देवेश कुमार ने सिविल सर्जन के सभी आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि सिविल सर्जन ने उनके निजी क्लीनिक में छापेमारी की, लेकिन उस समय वह वहां मौजूद नहीं थे। डीएस ने कहा कि मेरी माँ की तबीयत कई दिनों से खराब है, उन्हें बाहर लेकर जाना है और मैं आज उसी को लेकर घर पहुंचा था, और मैं अपने कार्य और अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभाता हूं, अस्पताल में रोजाना ऑपरेशन की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। मैं अपने कार्यकाल में बेहतर सेवा देने का कार्य कर रहा हूं और चिकित्सकों से भी सेवा ले रहा हूं। यदि सिविल सर्जन को लगता है कि वह डीएस के पद के योग्य नहीं हैं, तो वह इस्तीफा देने के लिए भी तैयार हैं।




