स्कूली बच्चों से लेकर मरीजों तक की बढ़ी परेशानी
उधवा। जिले के उधवा प्रखंड के गंगा तटीय इलाकों में बाढ़ और गंगा कटाव से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रखंड के पूर्वी प्राणपुर स्थित शांति मोड़ से कॉलोनी नंबर 10 तक जाने वाली मुख्य सड़क पिछले कई दिनों से बाढ़ के पानी में पूरी तरह डूबी हुई है। गंगा कटाव भी लगातार जारी है। सड़क पर करीब दो से तीन फीट पानी जमा होने के कारण यह रास्ता अब सड़क कम और तालाब ज्यादा नजर आ रहा है। सैकड़ों ग्रामीणों को मजबूरी में इसी पानी से होकर आवागमन करना पड़ रहा है।
चार-पांच दिनों से सड़क पर जमा है पानी :
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक पिछले चार-पांच दिनों से सड़क पर लगातार पानी जमा है। जलस्तर बढ़ने के साथ सड़क पर पानी की गहराई भी बढ़ती जा रही है। पैदल चलने वाले लोगों को घुटने भर पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है, जबकि बाइक सवारों को भी जान जोखिम में डालकर रास्ता पार करना पड़ रहा है।सड़क पर जल भराव के कारण स्कूली बच्चे और महिलाएं भी पानी के बीच रास्ता पार करने के लिए जूझते नजर आ रहे हैं।
बच्चों की पढ़ाई से लेकर मरीजों के इलाज तक पर असर :
सड़क के जलमग्न होने से शांति मोड़ से कॉलोनी नंबर 10 तक रहने वाले सैकड़ों परिवारों की दिनचर्या प्रभावित हो गई है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को हो रही है। पानी के कारण कई बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। वहीं अचानक किसी के बीमार पड़ने पर उसे अस्पताल तक पहुंचाना भी ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
दैनिक मजदूरी कर परिवार चलाने वाले लोगों की परेशानी भी बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की बदहाल स्थिति के कारण समय पर काम पर पहुंचना मुश्किल हो रहा है। पानी में बाइक चलाने के दौरान वाहन खराब होने और फिसलकर गिरने का खतरा भी बना हुआ है।
हर साल बाढ़-कटाव बढ़ाता है ग्रामीणों की परेशानी :
जिले के राजमहल और उधवा क्षेत्र में गंगा के जलस्तर में बढ़ोतरी के साथ बाढ़ और गंगा कटाव की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। गंगा तट के किनारे बसे गांवों में हर वर्ष बाढ़ का पानी पहुंचता है। कई दियारा क्षेत्रों में लगातार हो रहे कटाव के कारण लोगों के घर, स्कूल और खेती की जमीन तक गंगा में समा चुकी है।कटाव के कारण प्रभावित परिवारों को कई बार अपने ही हाथों से घर तोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन करना पड़ता है। बाढ़ के दौरान कई इलाकों का प्रखंड मुख्यालय से सीधा संपर्क भी प्रभावित हो जाता है, जिससे ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।



