• About Us
  • Contact Us
  • Privacy Policy
Atal Bharat  News
  • होम
  • देश और दुनिया
  • राज्य
    • झारखंड
    • बिहार
    • दिल्ली
    • गुजरात
    • उत्तरप्रदेश
  • शिक्षा
  • खेलकूद
  • मनोरंजन
  • राजनीति
  • स्वास्थ्य
  • चुनाव 2024
  • 🔥
  • झारखंड
  • साहिबगंज
  • देश और दुनिया
  • दिल्ली
  • राजनीति
  • Uncategorized
  • बिहार
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा
  • राज्य
Atal Bharat  NewsAtal Bharat  News
Font ResizerAa
  • होम
  • देश और दुनिया
  • राज्य
  • शिक्षा
  • खेलकूद
  • मनोरंजन
  • राजनीति
  • स्वास्थ्य
  • चुनाव 2024
Search
  • होम
  • देश और दुनिया
  • राज्य
    • झारखंड
    • बिहार
    • दिल्ली
    • गुजरात
    • उत्तरप्रदेश
  • शिक्षा
  • खेलकूद
  • मनोरंजन
  • राजनीति
  • स्वास्थ्य
  • चुनाव 2024
Have an existing account? Sign In
Follow US
© 2024, atalbharatnews.com | All Rights Reserved.
Atal Bharat News > शिक्षा > वायरल वीडियो के बाद बदली बच्चों की राह, लेकिन सवाल वही: आखिर स्कूल पहुंचने के लिए इतना जोखिम क्यों?

वायरल वीडियो के बाद बदली बच्चों की राह, लेकिन सवाल वही: आखिर स्कूल पहुंचने के लिए इतना जोखिम क्यों?

AMRIT RAJ
Last updated: 2026/08/09 at 12:44 PM
AMRIT RAJ
Share
SHARE

विदिशा/मध्य प्रदेश: स्कूल जाने की उम्र में बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, लेकिन मध्य प्रदेश के विदिशा जिले के पलोह गांव में कई बच्चे पढ़ाई के लिए जान जोखिम में डालने को मजबूर थे। स्टॉप डैम के पिलरों पर छलांग लगाकर नदी पार करते स्कूली बच्चों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन हरकत में आया। अब डैम पर लोहे की रेलिंग लगाई गई है और बच्चों की पढ़ाई के लिए स्थानीय स्तर पर नए इंतजाम की घोषणा भी हुई है।

लेकिन ग्रामीणों की मानें तो समस्या नई नहीं है। उनका कहना है कि बच्चे सालों से इसी खतरनाक रास्ते का इस्तेमाल कर स्कूल पहुंचते रहे हैं। वायरल वीडियो ने पहली बार इस परेशानी को बड़े स्तर पर सामने ला दिया।

Contents
वीडियो वायरल हुआ तो प्रशासन ने उठाए कदम‘करीब 4 फीट की छलांग लगानी पड़ती थी’15 किलोमीटर का चक्कर बचाने के लिए उठाते थे जोखिम‘हमसे पहले की पीढ़ी भी इसी रास्ते से गई’परिवारों के सामने था दो रास्तों का संकटशिकायतें हुईं, लेकिन समाधान नहीं निकलामानवाधिकार आयोग ने भी लिया संज्ञानविदिशा अकेला मामला नहीं, सागर में भी नदी पार कर स्कूल जाते हैं बच्चे मंडला में तबेले में लग रही थीं बच्चों की कक्षाएंबजट बड़ा, लेकिन जमीन पर सवाल छोटे नहींहाई कोर्ट में भी सरकारी स्कूलों की स्थिति पर सवाल

वीडियो वायरल हुआ तो प्रशासन ने उठाए कदम

पलोह गांव के स्टॉप डैम से बच्चों के छलांग लगाकर गुजरने का वीडियो सामने आने के बाद मामला प्रशासन से लेकर मानवाधिकार आयोग तक पहुंचा।

प्रशासन ने स्टॉप डैम पर लोहे की रेलिंग लगवा दी है। इसके अलावा पलोह में ही नौवीं और दसवीं कक्षा तक की पढ़ाई शुरू करने की घोषणा की गई है। वहीं, जिन विद्यार्थियों को आगे की पढ़ाई के लिए नदी पार करनी पड़ती थी, उनका दाखिला नजदीकी बंधेरा गांव के हाई स्कूल में कराने का फैसला लिया गया है।

विदिशा के एसडीएम क्षितिज शर्मा के मुताबिक, वीडियो सामने आने से पहले प्रशासन को इस समस्या की जानकारी नहीं थी। उन्होंने बताया कि बच्चों को पास के बंधेरा गांव के हाई स्कूल में दाखिला दिलाया गया है और स्टॉप डैम पर रेलिंग भी लगाई गई है।

मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों की खस्ता हालत का मामला अब कोर्ट में पहुंच गया है

‘करीब 4 फीट की छलांग लगानी पड़ती थी’

इस रास्ते से गुजर चुके 11वीं कक्षा के छात्र देव शर्मा बताते हैं कि उन्होंने भी नौवीं और दसवीं की पढ़ाई के दौरान इसी डैम को पार किया था।

देव के मुताबिक, डैम के पिलरों के बीच करीब चार फीट की छलांग लगानी पड़ती थी। उनके लिए यह कोई एक-दो दिन की मजबूरी नहीं थी, बल्कि स्कूल जाने की रोजमर्रा की चुनौती थी।

उनका कहना है कि उन्होंने कई बार गांव के स्तर पर डैम पर रेलिंग या कोई सुरक्षित व्यवस्था लगाने की मांग भी की थी, लेकिन उस समय उनकी शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया।

15 किलोमीटर का चक्कर बचाने के लिए उठाते थे जोखिम

वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले छात्रों में 10वीं कक्षा के छात्र केशव गुर्जर भी शामिल थे।

केशव ने बताया कि वह और दूसरे विद्यार्थी स्कूल जा रहे थे, तभी किसी ने उनका वीडियो बना लिया। जब उनसे पूछा गया कि आखिर बच्चे इतने खतरनाक रास्ते से क्यों जाते थे, तो उनका सीधा जवाब था—“मजबूरी है।”

उनके मुताबिक, सड़क के रास्ते से स्कूल जाने पर करीब 15 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था और वापसी में भी इतनी ही दूरी तय करनी होती थी। साइकिल से रोजाना इतना लंबा रास्ता तय करने में काफी समय लगता था, जिससे पढ़ाई प्रभावित होती थी।

इसी वजह से बच्चे समय बचाने के लिए स्टॉप डैम वाला रास्ता चुनते थे।

‘हमसे पहले की पीढ़ी भी इसी रास्ते से गई’

बंधेरा गांव की रहने वाली ऋचा गिरि गोस्वामी बताती हैं कि डैम से स्कूल जाने की समस्या केवल मौजूदा विद्यार्थियों तक सीमित नहीं थी।

उनके अनुसार, उनके बड़े भाई-बहन और उनसे पहले की पीढ़ी के बच्चे भी इसी रास्ते का इस्तेमाल करते रहे हैं। यानी कई वर्षों से बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा के बीच यह जोखिम बना हुआ था।

ग्रामीणों के मुताबिक, असली समस्या मिडिल स्कूल के बाद शुरू होती थी। पलोह में आगे की कक्षाओं की पर्याप्त सुविधा नहीं होने के कारण बच्चों को दूसरे इलाके में जाना पड़ता था।

परिवारों के सामने था दो रास्तों का संकट

केशव के पिता तरुवर सिंह गुर्जर बताते हैं कि बच्चों को आगे पढ़ाने के लिए परिवारों के सामने सीमित विकल्प थे।

विदिशा शहर भेजने पर बच्चों को रेलवे लाइन के साथ-साथ हाईवे भी पार करने पड़ते थे। दूसरी ओर निजी स्कूल में पढ़ाने का खर्च परिवार के लिए आसान नहीं था।

ऐसे में बेतवा नदी के दूसरी तरफ स्थित स्कूल में बच्चों का दाखिला कराया गया। परिवारों को पता था कि स्कूल पहुंचने के लिए स्टॉप डैम के पिलरों को पार करना होगा, लेकिन पढ़ाई जारी रखने के लिए उन्होंने इसी विकल्प को चुना।

शिकायतें हुईं, लेकिन समाधान नहीं निकला

देव शर्मा का दावा है कि उन्होंने सरपंच और दूसरे अधिकारियों के सामने कई बार इस समस्या को उठाया था।

उनके अनुसार, चार-पांच बार रेलिंग या सुरक्षित रास्ते की मांग की गई, लेकिन उस समय कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

हालांकि, वर्तमान सरपंच पूजा अहिरवार का कहना है कि उन्होंने इस मामले को आगे अधिकारियों तक नहीं पहुंचाया। उनका कहना है कि उनसे पहले भी पंचायत स्तर पर जिम्मेदारी संभालने वाले लोगों की ओर से इस दिशा में कोई प्रभावी पहल नहीं हुई थी।

मानवाधिकार आयोग ने भी लिया संज्ञान

बच्चों की सुरक्षा से जुड़े इस मामले पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी संज्ञान लिया है। आयोग ने मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट तक भी पहुंच चुका है। अदालत ने प्रशासन से निरीक्षण रिपोर्ट मांगी और बच्चों की सुरक्षा के लिए आवश्यक तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।

विदिशा अकेला मामला नहीं, सागर में भी नदी पार कर स्कूल जाते हैं बच्चे

पलोह की घटना सामने आने के बाद मध्य प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी स्कूली बच्चों की परेशानियों की तस्वीरें सामने आई हैं।

सागर जिले के रहली विकासखंड के बेलखेड़ी कलां गांव में बारिश के दौरान बच्चों को स्कूल जाने के लिए नदी पार करनी पड़ती है। पानी बढ़ने पर बच्चे कपड़े संभालकर और एक-दूसरे का हाथ पकड़कर नदी पार करते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हर मानसून में ऐसी स्थिति बनती है। मामले की जानकारी मिलने के बाद रहली जनपद पंचायत के सीईओ रवि पाटीदार ने निरीक्षण और आवश्यक व्यवस्था का भरोसा दिया है।

मंडला में तबेले में लग रही थीं बच्चों की कक्षाएं

मंडला जिले की सिंघनपुरी पंचायत में समस्या का रूप और भी अलग है। यहां पक्के स्कूल भवन की कमी के कारण छोटे बच्चों की कक्षाएं लंबे समय तक गाय के तबेले में चलने की बात सामने आई।

गांव के सरपंच प्रताप सिंह मरावी के अनुसार, स्कूल भवन के निर्माण के लिए पंचायत और जनसुनवाई के माध्यम से कई बार आवेदन दिए गए, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

मामला सामने आने के बाद मंडला जिला प्रशासन ने कार्रवाई शुरू करने की बात कही है। कलेक्टर राहुल नामदेव धोटे के मुताबिक, स्कूल को शासन से मंजूरी मिल चुकी है और निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

बजट बड़ा, लेकिन जमीन पर सवाल छोटे नहीं

विदिशा, सागर और मंडला की तस्वीरें अलग-अलग हैं, लेकिन सवाल एक ही है—क्या सरकारी स्कूल तक सुरक्षित पहुंच और जरूरी बुनियादी सुविधाएं हर बच्चे का अधिकार नहीं हैं?

कहीं बच्चे स्टॉप डैम के पिलरों पर छलांग लगाकर स्कूल पहुंच रहे थे, कहीं उन्हें बरसात में नदी पार करनी पड़ रही है और कहीं स्कूल भवन के अभाव में अस्थायी जगह पर कक्षाएं संचालित होने की बात सामने आई।

यह स्थिति ऐसे समय में सामने आ रही है जब मध्य प्रदेश सरकार के बजट में स्कूल शिक्षा विभाग के लिए 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान बताया गया है। सरकार का जोर शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने, स्कूलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और विद्यार्थियों के लिए बेहतर माहौल तैयार करने पर है।

इसके बावजूद सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति को लेकर सवाल लगातार उठते रहे हैं।

हाई कोर्ट में भी सरकारी स्कूलों की स्थिति पर सवाल

सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ में दायर जनहित याचिका पर भी सुनवाई हो चुकी है।

याचिका में कैग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सरकारी स्कूलों में भवन, बिजली, शौचालय और दूसरी मूलभूत सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया गया है। इसके अलावा शिक्षकों के बड़ी संख्या में पद खाली होने की बात भी याचिका में कही गई है।

वायरल वीडियो ने सिर्फ एक डैम की कहानी दिखाई

पलोह के बच्चों का वीडियो कुछ सेकंड का था, लेकिन उसने मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में स्कूली शिक्षा की बड़ी तस्वीर पर बहस छेड़ दी।

रेलिंग लगने और बच्चों के दाखिले की व्यवस्था होने से पलोह की तत्काल समस्या में बदलाव जरूर आया है। मगर सवाल यह है कि क्या हर गांव में समस्या सामने आने के लिए किसी बच्चे के जोखिम भरे सफर का वीडियो वायरल होना जरूरी है?

स्कूल तक पहुंचना किसी बच्चे के लिए रोज का खतरा नहीं, बल्कि उसका सामान्य अधिकार होना चाहिए।

Share This Article
Twitter Email Copy Link Print
Previous Article धर्मेंद्र प्रधान ने बताया, क्यों दिया था शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा? बोले- ‘मंत्री पद मेरे लिए प्रतिष्ठा का विषय नहीं’
Next Article Sahibganj: साहिबगंज कॉलेज में विश्व आदिवासी दिवस पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन, 
Leave a comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Sahibganj: स्वतंत्रता दिवस को लेकर सिदो-कान्हू स्टेडियम में परेड का पूर्वाभ्यास शुरू
August 9, 2026
Sahibganj: स्वच्छता के संदेश के साथ मैदान में उतरीं दो टीमें, आखिरी गेंद पर नगर परिषद ने मारी बाजी
August 9, 2026
Sahibganj: विश्व आदिवासी दिवस पर साहिबगंज में गूंजा संस्कृति और अधिकारों के संरक्षण का संदेश
August 9, 2026
Sahibganj: शिवगादी धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, सोमवार को डेढ़ लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान
August 9, 2026

You Might Also Like

शिक्षा

JPSC परीक्षा रद्द करने की मांग पर सरकार ने दी सहमति? छात्रों ने कहा- ‘CBI जांच होने तक जारी रहेगा आंदोलन’

By AMRIT RAJ
झारखंडराज्यशिक्षासाहिबगंज

Sahibganj: पुलिस बनी मसीहा: बेघर मां-बेटी को मिला नया सहारा, बेटी के सपनों को मिली नई उड़ान

By CHANDAN SINGH
झारखंडरांचीशिक्षा

Ranchi: कानून से लागू हो भर्ती कैलेंडर, डिजिटल ट्रैकिंग से रुके धांधली’; आजसू प्रमुख सुदेश महतो की सरकार से मांग

By AMRIT RAJ
बिहारशिक्षा

बिहार सम्राट नशामुक्त युवा दो अंतिम

By CHANDAN SINGH
Atal Bharat  News

About US

AtalBharat TV is Digital Wave Media News Channel. We are guided by a clear vision, mission and the core Indian value of “Satyam Shivam Sundaram”. Amidst the threats of fakes and deep-fakes, we will strive to serve audiences across geographies with truth-based news and information.

Important Pages
  • About Us
  • Contact Us
  • Privacy Policy
Usefull Links
  • DNPA Code
  • Submit News
  • Advertise

Contact Address

Helpline: +91-6204459521
9471359719
Email: atalbharatnews@gmail.com
Address: Sahibganj, Jharkhand, 816109.

© 2024, atalbharatnews.com | All Rights Reserved.

Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?