145 छात्र ही मिले उपस्थित, कक्षाओं में बिना निगरानी के खेलते मिले बच्चे
उधवा। प्रखंड मुख्यालय से करीब दो किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम स्थित मोहनपुर पंचायत के उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय, बाघपिंजरा की गुरुवार को सामने आई स्थिति ने सरकारी विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था और मध्यान्ह भोजन योजना के संचालन पर कई सवाल खड़े कर दिए।विद्यालय में कुल 335 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, लेकिन पूरे विद्यालय की जिम्मेदारी केवल एक प्रधानाध्यापक अशरफ अली के कंधों पर है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई, अनुशासन और विद्यालय संचालन किस प्रकार हो रहा है, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है। गुरुवार को लगभग 11:30 बजे विद्यालय पर प्रधानाध्यापक अपने कक्ष में कार्यालयी कार्यों में व्यस्त मिले। वहीं दूसरी ओर अधिकांश बच्चे बिना किसी निगरानी के अपनी-अपनी कक्षाओं एवं विद्यालय परिसर में खेलते नजर आए। कई कक्षाओं से शोर-शराबे की आवाजें आ रही थीं, जबकि कुछ बच्चे विद्यालय परिसर के बाहर भी खेल रहे थे।विद्यालय में विद्यार्थियों की उपस्थिति भी अपेक्षाकृत कम पाई गई। कक्षा एक से पांच तक कुल 335 नामांकित छात्रों में से मात्र 145 छात्र ही उपस्थित मिले। इससे विद्यालय में बच्चों की नियमित उपस्थिति और पठन-पाठन व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। सबसे चिंताजनक बात यह रही कि विद्यालय में गुरुवार को मध्यान्ह भोजन का संचालन पूरी तरह बंद मिला। बच्चों से पूछताछ करने पर उन्होंने बताया कि आज उन्हें भोजन नहीं मिलेगा। इससे बच्चों में मायूसी देखी गई। सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चों के लिए मध्यान्ह भोजन पोषण का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। ऐसे में योजना का बंद होना गंभीर विषय है।

इस संबंध में पूछे जाने पर प्रधानाध्यापक अशरफ अली ने स्वीकार किया कि विद्यालय में चावल उपलब्ध नहीं रहने के कारण गुरुवार को मध्यान्ह भोजन नहीं बनाया जा सका। उन्होंने बताया कि खाद्यान्न समाप्त होने के कारण एमडीएम योजना प्रभावित हुई। विद्यालय में मात्र एक शिक्षक के भरोसे 335 बच्चों की पढ़ाई होना शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक तस्वीर को सामने लाता है। इसका सीधा असर बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर पड़ रहा है।
क्या कहते हैं प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी

प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी अटल बिहारी भगत ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में विद्यालय में मध्यान्ह भोजन बंद नहीं होना चाहिए। उन्होंने बताया कि लगभग एक सप्ताह पूर्व ही सभी विद्यालयों के लिए चावल का आवंटन किया जा चुका है। यदि किसी विद्यालय में चावल समाप्त हो रहा था तो संबंधित प्रधानाध्यापक को इसकी सूचना पहले ही बीआरसी कार्यालय को देनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि बाघपिंजरा विद्यालय की ओर से चावल समाप्त होने की कोई सूचना कार्यालय को नहीं दी गई। समय रहते सूचना मिलती तो तत्काल वेंडर के माध्यम से चावल उपलब्ध करा दिया जाता और मध्यान्ह भोजन बाधित नहीं होता।




