बरहरवा में दुर्गा मंदिर की 50वीं जयंती पर भगवती कथा में भक्तों का सैलाब उमड़ा. देवी महात्म्य, समुद्र मंथन व संस्कारों पर प्रवचन.
बरहरवा में दुर्गा मंदिर की 50वीं जयंती पर भगवती कथा में भक्तों का सैलाब उमड़ा. देवी महात्म्य, समुद्र मंथन व संस्कारों पर प्रवचन.
बरहरवा प्रतिनिधि.बरहरवा नगर पंचायत क्षेत्र के कुशवाहा टोला स्थित श्री श्री सार्वजनिक दुर्गा मंदिर की 50वीं वर्षगांठ (स्वर्ण जयंती) पर आयोजित पांच दिवसीय श्री श्री भगवती कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. मां भगवती की आराधना और कथा श्रवण के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं ने देवी के चरणों में शीश नवाकर परिवार की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगलमय जीवन की कामना की. पूरे पूजा पंडाल में भक्तिमय माहौल बना रहा.
देवी महात्म्य से समुद्र मंथन तक की कथा
कथावाचक श्रद्धेय संजयकृष्ण स्नेह (व्यासजी महाराज) ने अपनी मधुर वाणी और भावपूर्ण शैली में देवी महात्म्य के विभिन्न प्रसंगों का वर्णन किया. उन्होंने नवरात्र के प्रारंभ, मां पार्वती के जन्म, मां दुर्गा के प्राकट्य और राधा जन्म की कथा विस्तार से सुनाई. इसके साथ ही स्त्री-पुरुषों के सोलह शृंगार, जीवन के सोलह संस्कार, समुद्र मंथन तथा मां लक्ष्मी और मां तारा से जुड़ी धार्मिक कथाओं के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ज्ञान दिया.
माता-पिता और बुजुर्गों के सम्मान का संदेश
प्रवचन के दौरान संजयकृष्ण महाराज ने विभिन्न पौराणिक प्रसंगों के माध्यम से भक्ति, श्रद्धा, संस्कार और आध्यात्मिक जीवन के महत्व को समझाया. उन्होंने कहा कि प्रत्येक मनुष्य को अपने माता-पिता और बड़े-बुजुर्गों का आदर-सम्मान करना चाहिए तथा उनकी सेवा को अपना कर्तव्य समझना चाहिए. दूसरों की बुराई करने से बचना और अवसर मिलने पर जरूरतमंदों की सेवा करना भी जरूरी है. धार्मिक संस्कार और अच्छे कर्म ही जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं.
धार्मिक झांकियों और भजनों ने बांधा समां
कथा के दौरान प्रस्तुत आकर्षक धार्मिक झांकियां कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहीं. देवी-देवताओं के विभिन्न स्वरूपों पर आधारित झांकियों को देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे. वहीं, कथावाचक के श्रीमुख से प्रस्तुत मधुर भजनों ने वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया. मां दुर्गा की आराधना, भक्ति गीतों और ‘जय माता दी’ के जयकारों से पूजा पंडाल गूंजता रहा. श्रद्धालु पूरी तन्मयता के साथ कथा का श्रवण करते नजर आये.
मंदिर की स्वर्ण जयंती के अवसर पर आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखा गया.



