JSFC बंद होने की कगार पर है. केवल एक कार्यवाहक अध्यक्ष के नेतृत्व में संस्था अभी काम कर रही है.
रांचीः राज्य में खाद्य सुरक्षा के नाम पर सरकारी उदासीनता का आलम यह है कि इसके लिए बनी राज्यस्तरीय सर्वोच्च संवैधानिक संस्था बंद होने की कगार पर है. प्रभारी अध्यक्ष के भरोसे चल रहे राज्य खाद्य आयोग में एक मात्र सदस्य शबनम परवीन का कार्यकाल भी जनवरी 2027 में समाप्त हो रहा है. जाहिर तौर पर कोरम (न्यूनतम आवश्यक सदस्यों की संख्या) के अभाव में पहले से शिकायतों पर सुनवाई बंद होने के बाद प्रभारी अध्यक्ष सह एकमात्र सदस्य का भी कार्यकाल समाप्त होते ही आयोग में कामकाज प्रभावित हो जायेगा. आयोग के पूर्व अध्यक्ष हिमांशु शेखर चौधरी को पद से हटाए जाने के बाद, वर्तमान में आयोग की एकमात्र सदस्य शबनम परवीन प्रभारी अध्यक्ष के रूप में विगत ढाई साल से कामकाज संभाल रही हैं.
आयोग बिना कर्मचारियों के ही रह जाएगा

झारखंड राज्य खाद्य आयोग (Jharkhand State Food Commission) में अध्यक्ष के अलावा सदस्यों के कुल 5 पद स्वीकृत हैं जिसमें एक मात्र सदस्य वर्तमान में है. यह कार्यालय आउटसोर्स किए गए कर्मचारियों की सहायता से चल रहा है जिनका कार्यकाल अक्टूबर 2026 में समाप्त हो रहा है. स्पष्ट है कि यदि एजेंसी वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों की सेवाओं का नवीनीकरण नहीं करती है, तो आयोग बिना कर्मचारियों के रह जाएगा.आयोग में दर्ज शिकायतों की सुनवाई जिलों के भरोसे
खाद्य सुरक्षा से संबंधित शिकायतों की सुनवाई आयोग में पिछले ढाई साल से बंद है. कोरम के अभाव में आयोग में दाखिल शिकायतों पर सुनवाई अपर समाहर्ता के माध्यम से जिला शिकायत निवारण पदाधिकारी के जरिए होता है. आयोग द्वारा अपर समाहर्ता पर दवाब बनाया जाता है कि 15 दिनों के अंदर शिकायतों का निष्पादन कर आयोग को भेंजे. राज्य खाद्य आयोग की प्रभारी अध्यक्ष शबनम परवीन कहती हैं कि अब तक वेबसाइट के माध्यम से 1572 केस आए हैं जिसमें से 1337 निष्पादित हो चुके हैं. इसी तरह से वाट्सअप से 4178 शिकायत प्राप्त हुई हैं जिसमें 2587 निष्पादित हुई हैं. आयोग को ऑफलाइन माध्यमों से 849 शिकायतें मिली हैं, जिनमें से 389 का समाधान कर दिया गया है.
शिकायतों पर आयोग संज्ञान लेता हैः शबनम परवीन

प्रभारी अध्यक्ष ने कहा कि आयोग के पास राशन कम देने से लेकर राशन नहीं देने, आंगनबाड़ी केंद्रों में गर्भवती महिलाओं को पोषाहार नहीं मिलने, स्कूलों में और आंगनबाड़ी केंद्रों में अंडा एवं अन्य पौष्टिक अनाज नहीं देने, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) की राशि नहीं मिलने तक की शिकायत आती है जिस पर आयोग संज्ञान लेता है और आवश्यक कार्रवाई की जाती है. लेकिन कोरम के अभाव के कारण हम इन शिकायतों को जिला शिकायत निवारण पदाधिकारी के माध्यम से निष्पादित कराते हैंराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम से संबंधित गजट का प्रकाशन भारत सरकार के द्वारा 10 सितंबर, 2013 को हुआ था जिसे 5 जुलाई, 2013 से लागू किया गया.इस अधिनियम की धारा 16 के प्रावधानों के अनुसार, प्रत्येक राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा इस अधिनियम के कार्यान्वयन की निगरानी और समीक्षा के उद्देश्य से एक राज्य खाद्य आयोग का गठन करना है. इसके तहत झारखंड सरकार ने एक विशेष आयोग गठित करने का निर्णय लिया और खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग ने अधिसूचना संख्या 1632 के माध्यम से 13 अप्रैल, 2017 को झारखंड राज्य खाद्य आयोग (JSFC) का गठन किया.पहले अध्यक्ष सुधीर प्रसाद

राज्य खाद्य आयोग के गठन के बाद पहले अध्यक्ष सुधीर प्रसाद, आईएएस (सेवानिवृत्त) को बनाया गया और सदस्य के रूप में उपेंद्र नारायण उरांव, आईएएस (सेवानिवृत्त), श्रीमती बीना मिश्रा, आर.के. करण, हलधर महतो और रंजना कुमारी ने कामकाज संभाला. आयोग को राज्य में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) के कार्यान्वयन की निगरानी और मूल्यांकन करने का दायित्व सौंपा गया है. जिसके तहत लक्षित सार्वजनिक वितरण प्रणाली, एकीकृत बाल विकास सेवाएं और मध्याह्न भोजन जैसी तीन योजनाएं इस अधिनियम के दायरे में आती हैं.



