बढ़ते जलस्तर और तेज बहाव के बीच दिन-रात चल रहा काम, सोनार तकनीक से आकलन के आधार पर सुरक्षा कार्य तेज
गंगा के बढ़ते जलस्तर से बढ़ी चुनौती, तेज बहाव के बीच कटावरोधी कार्य जारी
तालझारी। गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर और तेज होते बहाव के बीच रेलवे ट्रैक को सुरक्षित रखने के लिए चल रहा कटावरोधी अभियान लगातार पांचवें दिन भी जारी रहा। बारिश के बीच रेलवे के अधिकारी, कर्मचारी और स्थानीय मजदूर पूरी मुस्तैदी से कार्य में जुटे हैं। मालदा और हावड़ा मंडल के 50 से अधिक अधिकारी तथा करीब 1200 से अधिक रेलकर्मी और मजदूर प्रभावित क्षेत्र में दिन-रात काम कर रहे हैं। रेलवे की ओर से अगले दिन भी कार्य जारी रखने की तैयारी है।
मालदा मंडल के डीआरएम मनीष कुमार गुप्ता ने बताया कि गंगा के जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी के साथ बहाव भी काफी तेज हुआ है, जिससे स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। इसके बावजूद कटावरोधी कार्य लगातार जारी है। उन्होंने कहा कि रेलवे की कोशिश केवल तत्काल सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि कटाव की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं।
बोल्डर, स्लीपर और बांस की बॉक्सिंग से रोकने का प्रयास :

डीआरएम ने बताया कि कटाव प्रभावित हिस्सों में बोल्डर और स्लीपर डालने के साथ-साथ बांस की बॉक्सिंग तैयार की जा रही है। इन बॉक्सों में पत्थर भरकर नदी के भीतर संवेदनशील स्थानों पर डाला जा रहा है, ताकि पानी के तेज बहाव को रोकने और रेल ट्रैक के आसपास के हिस्से को सुरक्षित रखने में मदद मिल सके।
कटावरोधी कार्य को तकनीकी आधार देने के लिए सोनार तकनीक से नदी के भीतर की स्थिति, गहराई और तल का आकलन किया गया है। इसी जानकारी के आधार पर इंजीनियर संवेदनशील हिस्सों में आवश्यक सुरक्षा कार्य कर रहे हैं।
यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता :

डीआरएम ने कहा कि रेल यात्रियों की सुरक्षा रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी को देखते हुए फिलहाल डाउन लाइन पर ट्रेनों का परिचालन बंद रखा गया है, जबकि अप लाइन से नियंत्रित गति के साथ ट्रेनों का परिचालन कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रभावित क्षेत्र में रेलवे की पूरी तकनीकी टीम लगातार निगरानी कर रही है। सीमित स्थान और लगातार बारिश के बावजूद काम में लगे कर्मचारियों की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
स्थिति कब तक सामान्य हो पाएगी :
इस सवाल पर डीआरएम ने कहा कि फिलहाल इसके बारे में निश्चित समय बताना संभव नहीं है। नदी के जलस्तर, बहाव और कटाव की स्थिति की लगातार समीक्षा की जा रही है। परिस्थितियों के अनुकूल होने और ट्रैक की सुरक्षा सुनिश्चित होने के बाद ही डाउन लाइन पर परिचालन बहाल करने का निर्णय लिया जाएगा।



