महाराजपुर पहुंचे डीआरएम मनीष गुप्ता, बोले- यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता; जल्द वैकल्पिक परिचालन बढ़ाने का प्रयास
अब और कितना समय लगेगा— जवाब स्पष्ट नहीं
साहिबगंज। सकरीगली-महाराजपुर के बीच झंझड़ी पुल। के समय गंगा के तेज कटाव से रेलवे ट्रैक को बचाने के लिए पिछले करीब 72 घंटे से दिन-रात युद्धस्तर पर कटावरोधी कार्य जारी है। इसके बावजूद गंगा की तेज धार और लगातार हो रहे भू-कटाव के कारण कार्य कब तक पूरी तरह पूरा होगा, इसकी निश्चित समय-सीमा अब तक सामने नहीं आई है। शुक्रवार को मालदा रेल मंडल के डीआरएम मनीष गुप्ता विशेष सैलून से महाराजपुर पहुंचे और कटाव प्रभावित क्षेत्र का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने गंगा की धार, कटाव की स्थिति और रेलवे की ओर से चलाए जा रहे सुरक्षा कार्यों का जायजा लिया। डाउन लाइन पर परिचालन सुरक्षा कारणों से प्रभावित है, जबकि अप लाइन पर प्रतिबंधों के साथ परिचालन किया जा रहा है।
सोनार सर्वे के आधार पर इंजीनियर कर रहे कटावरोधी कार्य :
रेलवे की ओर से गंगा की गहराई और नदी के भीतर कटाव की स्थिति का सोनार (साउंड नेविगेशन एंड रेंजिंग) से सर्वे कराया जा चुका है। इसी जांच से प्राप्त जानकारी के आधार पर रेलवे के इंजीनियर कटाव प्रभावित हिस्से में सुरक्षा संरचनाओं की योजना बनाकर कार्य करा रहे हैं। सोनार तकनीक ध्वनि तरंगों के माध्यम से पानी के भीतर की स्थिति, गहराई और संरचनाओं की दूरी आदि का आकलन करने में उपयोगी होती है।

डीआरएम ने अधिकारियों के साथ नाव से गंगा के प्रभावित हिस्से का निरीक्षण किया। इसके बाद करीब 300 मीटर के क्षेत्र में पैदल भ्रमण कर कटावरोधी कार्यों की स्थिति देखी। कहीं कटाव रेलवे ट्रैक से कुछ मीटर की दूरी पर है तो कहीं अपेक्षाकृत अधिक दूरी पर। तेज बहाव के कारण जमीन लगातार कट रही है, जिससे सुरक्षा कार्यों के सामने चुनौती बनी हुई है।
बांस की बॉक्सिंग में पत्थर, क्रेन से गंगा में डाले जा रहे स्लीपर :
मौके पर रेलवे कर्मियों और स्थानीय मजदूरों की टीमें लगातार काम में जुटी हैं। बांस की बॉक्सिंगनुमा संरचना तैयार कर उसमें पत्थर भरकर गंगा में डाला जा रहा है। इसके अलावा क्रेन की मदद से कंक्रीट स्लीपरों को भी गंगा की धार में उतारा जा रहा है। लोहे की जाली अथवा तारनुमा संरचना में पत्थरों को बांधकर पानी में डालने का काम भी जारी है। इन उपायों का उद्देश्य नदी की तेज धार से मिट्टी के कटाव को नियंत्रित करना और रेलवे ट्रैक के नीचे तथा आसपास की जमीन को मजबूत करना है। लेकिन गंगा की रफ्तार इतनी तेज है कि एक तरफ सुरक्षा संरचना तैयार की जा रही है तो दूसरी तरफ नए हिस्से में कटाव की चुनौती सामने आ रही है।

गंगा पंप नहर विभाग भी रेलवे के साथ जुटा :
कटावरोधी अभियान में साहिबगंज जिला प्रशासन के विभिन्न पदाधिकारी और विभाग भी रेलवे को सहयोग कर रहे हैं। गंगा पंप नहर विभाग के कार्यपालक अभियंता प्रेम सोरेन के नेतृत्व में विभागीय कर्मी और पदाधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे। टीम ने प्रभावित क्षेत्र की स्थिति का जायजा लिया और रेलवे के साथ समन्वय कर आवश्यक सहयोग में जुटी रही। इससे पहले भी गंगा पंप नहर विभाग की टीम ने महाराजपुर पहुंचकर कटाव स्थल का निरीक्षण किया था और रेलवे को विभागीय सहयोग का भरोसा दिया था।
यात्रियों के लिए राहत बढ़ाने की तैयारी, सुरक्षा से समझौता नहीं: डीआरएम :

डीआरएम मनीष गुप्ता ने कहा कि रेलवे की पहली प्राथमिकता यात्रियों और रेल परिचालन की सुरक्षा है। उन्होंने संकेत दिया कि परिस्थितियां अनुकूल होने पर आने वाले दिनों में अप लाइन से ट्रेन सेवाओं को बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। वहीं डाउन लाइन पर सुरक्षा जांच और कटावरोधी कार्य पूरा होने तक परिचालन बहाल करने को लेकर कोई निश्चित समय-सीमा नहीं बताई गई है।
कटाव के कारण कई ट्रेनों को रद्द, डायवर्ट अथवा शॉर्ट टर्मिनेट किया गया है। रेलवे यात्रियों की सुविधा के लिए वैकल्पिक परिचालन की व्यवस्था कर रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार डाउन लाइन पर परिचालन रोककर अप लाइन से प्रतिबंधित गति में ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। डीआरएम ने स्पष्ट किया कि यात्रियों को असुविधा हो रही है, लेकिन ट्रैक की सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना सामान्य परिचालन शुरू करना संभव नहीं है।
फिलहाल रेलवे का पूरा ध्यान गंगा की तेज धार को नियंत्रित करने और रेल ट्रैक को सुरक्षित रखने पर है। 72 घंटे से लगातार चल रहे इस अभियान के बावजूद काम की निश्चित समाप्ति अवधि अभी तय नहीं हो सकी है।



