लखनऊ में शिक्षक अधिवेशन में 12 प्रस्ताव पारित, जिसमें आरटीई से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट और पुरानी पेंशन बहाली प्रमुख हैं. मांगों पर कार्रवाई न होने पर संसद मार्च की चेतावनी.
रांची. शिक्षकों के राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों को लेकर लखनऊ में आयोजित शिक्षक अधिवेशन में 12 प्रस्ताव पारित किये गये. अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में आयोजित अधिवेशन की अध्यक्षता टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ दिनेश चंद्र शर्मा ने की. उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक मुख्य अतिथि और यूपी भाजपा के उपाध्यक्ष नीरज सिंह विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए.फेडरेशन के राष्ट्रीय महासचिव सह अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश महासचिव राममूर्ति ठाकुर ने कहा कि शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से मुक्त करने के लिए केंद्र सरकार संसद के माध्यम से पहल करे. उन्होंने कहा कि इस मामले में पहल नहीं हुई, तो शिक्षक बड़े आंदोलन की ओर बढ़ेंगे.
उन्होंने शिक्षकों के वेतन, राष्ट्रीय सेवा शर्तों और स्वास्थ्य सुरक्षा में एकरूपता की मांग उठायी. उनका कहना था कि जब देश में एक शिक्षा नीति और शिक्षक नियुक्ति की एक व्यवस्था है, तो वेतन और अन्य सुविधाओं में इतनी विभिन्नता क्यों हो.
शीतकालीन सत्र में संसद मार्च
राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ दिनेश चंद्र शर्मा ने कहा कि शिक्षकों की मांगों को लेकर संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया संसद मार्च करेगा. अधिवेशन में देश के विभिन्न राज्यों से आये शिक्षक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. झारखंड से फेडरेशन के राष्ट्रीय महासचिव अजय कुमार सिंह और राजेश कुमार सिन्हा शामिल हुए.
ये 12 प्रस्ताव हुए पारित
देशभर में विद्यालयों के विलय (मर्जर) पर रोक लगायी जाए.
आरटीई से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से मुक्त करने के लिए केंद्र सरकार संसद में संशोधन प्रस्ताव लाये.
पुरानी पेंशन योजना बहाल की जाए.
सभी राज्यों में शिक्षकों के लिए केंद्रीय वेतनमान लागू कर वेतन में एकरूपता लायी जाए.
शिक्षकों को एमएसीपी का लाभ दिया जाए.
प्रत्येक प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक का एक पद सृजित किया जाये.
चुनाव, जनगणना और आपदा जैसी वास्तविक ड्यूटी को छोड़कर शिक्षकों को अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्त किया जाए.
केंद्रीय विद्यालयों की तर्ज पर देशभर के विद्यालयों के लिए समान वार्षिक अवकाश तालिका लागू की जाए.
शिक्षकों को परिवार सहित न्यूनतम 20 लाख रुपये की स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा दी जाए.
प्राथमिक शिक्षकों को भी विधान परिषद के शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में मताधिकार और चुनाव लड़ने का अधिकार मिले.
शिशु देखभाल भत्ते के लिए दो बच्चों की सीमा समाप्त की जाए.
शिक्षक प्रशिक्षण प्राप्त और टीईटी उत्तीर्ण आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर शिक्षक पद पर नियुक्ति का अवसर दिया जाए.



