झारखंड हाईकोर्ट में JPSC 11वीं-13वीं, CDPO, FSO और JSSC CGL 2023 परीक्षाएं रद्द करने के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई आज। मामले पर जल्द आएगा फैसला, अभ्यर्थियों के भविष्य पर संकट।
रांची : झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा यानी JSSC CGL से जुड़े मामले में झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार, 8 अक्टूबर को फिर सुनवाई होगी. बुधवार, 7 अक्टूबर को जस्टिस दीपक रोशन की पीठ में मामले की सुनवाई हुई. इस दौरान प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता ने अपनी दलीलें रखीं. इसके बाद राज्य सरकार की ओर से भी अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा गया.CID की अपडेटेड जांच रिपोर्ट पेश
बुधवार की सुनवाई के दौरान CID की ओर से की जा रही जांच की अपडेटेड रिपोर्ट अदालत में पेश की गयी. जांच रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में अदालत को सौंपा गया. अब गुरुवार की सुनवाई में इस रिपोर्ट को लेकर सरकार की ओर से विस्तृत बहस की जाएगी. माना जा रहा है कि CID की जांच रिपोर्ट मामले की आगे की सुनवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.
गुरुवार को रिपोर्ट पर होगी बहस
बुधवार को प्रार्थी की ओर से बहस पूरी होने के बाद गुरुवार की सुनवाई सरकार की दलीलों पर केंद्रित रहेगी. सरकार की ओर से अधिवक्ता CID की अपडेटेड जांच रिपोर्ट के आधार पर अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे. इसके साथ ही मामले से जुड़े अन्य कानूनी और जांच संबंधी पहलुओं पर भी दलीलें रखी जा सकती हैं.
JSSC CGL को लेकर बनी हुई है नजर
JSSC CGL परीक्षा से जुड़े विवाद को लेकर अभ्यर्थियों की नजर हाईकोर्ट की कार्यवाही पर बनी हुई है. मामले में जांच रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश होने के बाद अब गुरुवार की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है. अदालत में सरकार की ओर से CID रिपोर्ट पर रखे जाने वाले पक्ष के बाद मामले की दिशा को लेकर स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है.
सुबह 11.30 शुरू हुई थी सुनवाई
इससे पहले, झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) द्वारा आयोजित संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता (11वीं से 13वीं), बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO), फूड सेफ्टी ऑफिसर (FSO) और जेएसएससी सीजीएल (JSSC CGL) परीक्षा 2023 के विज्ञापनों को रद्द करने संबंधी राज्य सरकार की अधिसूचना के खिलाफ दायर याचिकाओं पर झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई सुबह 11.30 बजे शुरू हुई. सबसे पहले जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ में प्रार्थियों की ओर से राज्य के पूर्व महाधिवक्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव रंजन की सुनवाई पूरी हुई. इसके बाद फिलहाल अन्य प्रार्थियों की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरीय अधिवक्ता एम एस पटवालिया, अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अधिवक्ता अमृतांश वत्स की ओर से पक्ष रखा गया. लंच के बाद उच्च न्यायलय की बेंच ने राज्य सरकार को अपना पक्ष रखने का समय दिया. जिसमें सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने शामिल हुई और पक्ष रखी. जिसकी सुनवाई अब तक चल रही है. पूर्व में अदालत द्वारा दिए गए आदेश के आलोक में प्रतिवादियों (राज्य सरकार व संबंधित आयोग) की ओर से पहले ही विस्तृत जवाब शपथ पत्र (Affidavit) के माध्यम से कोर्ट में दाखिल किया जा चुका है.
विभिन्न परीक्षाओं के अभ्यर्थियों ने दी चुनौती
उल्लेखनीय है कि अदालत के समक्ष अलग-अलग याचिकाओं के जरिए अभ्यर्थियों ने सरकार और आयोग के विज्ञापन रद्द करने के निर्णय को चुनौती दी है. प्रार्थी रमेश उरांव व अन्य की ओर से याचिका दायर कर जेएसएससी सीजीएल परीक्षा-2023 को रद्द करने की सरकार की अधिसूचना को चुनौती दी गई है, जबकि प्रार्थी सुभाष मुरमू व अन्य ने सीडीपीओ नियुक्ति परीक्षा रद्द किए जाने के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. इसके साथ ही प्रार्थी दीपमाला, आशीष अक्षत, आकांक्षा मिंज व अन्य ने जेपीएससी 11वीं से 13वीं प्रतियोगिता परीक्षा तथा प्रार्थी सौरभ सिंह व अन्य ने फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा रद्द करने के फैसले को निरस्त करने की मांग की है.
अभ्यर्थियों के भविष्य पर छाया संकट
प्रार्थियों की ओर से कोर्ट में दलील दी गई कि परीक्षा प्रक्रियाओं के अंतिम चरण या विज्ञापन जारी होने के बाद अचानक बिना किसी ठोस व तार्किक कारण के पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करना गलत है. सरकार के इस कदम से वर्षों से तैयारी कर रहे हजारों योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है और उनकी उम्र सीमा भी समाप्त हो रही है. फिलहाल हाईकोर्ट की इस पीठ में मामले पर बहस जारी है और अदालत के रुख पर राज्यभर के युवाओं की नजरें टिकी हुई हैं.



