संतमत सत्संग आश्रम, कदुआ-बिशनपुर में सात दिवसीय ध्यान-साधना शिविर का सफल समापन हुआ, जिसमें सैकड़ों साधकों ने भाग लिया और आध्यात्मिक उपदेश प्राप्त किए.
पतना : प्रखंड के कदुआ-बिशनपुर स्थित प्रसिद्ध संतमत सत्संग आश्रम में बीते 24 अक्टूबर से चल रहे सात दिवसीय ध्यान-साधना शिविर का शुक्रवार को भव्य समापन हो गया. इस आध्यात्मिक शिविर में आसपास के दर्जनों गांवों से आए बड़ी संख्या में साधक-साधिकाओं ने भाग लिया. सात दिनों तक चले इस विशेष आयोजन में प्रतिदिन सामूहिक ध्यान-साधना के साथ-साथ सत्संग और आध्यात्मिक प्रवचन का आयोजन किया गया, जिससे पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा.
स्वामी साधु शरण जी महाराज ने दिया आध्यात्मिक उपदेश
समापन दिवस के प्रातःकालीन (सुबह के) सत्संग में पूज्यपाद स्वामी साधु शरण जी महाराज ने ‘गुरु की निष्कपट सेवा’ विषय पर साधकों को विस्तार से प्रवचन दिया. उन्होंने अपने उपदेश में कहा कि गुरु की सेवा केवल बाहरी रूप से की जाने वाली सेवा नहीं है, बल्कि गुरु के बताए मार्ग पर पूरी श्रद्धा और निष्कपट भाव से चलना ही उनकी सच्ची सेवा है. मन में किसी भी प्रकार का स्वार्थ या अहंकार रखकर की गई सेवा से वास्तविक आध्यात्मिक लाभ कभी नहीं मिलता.
ध्यान से मिलती है जीवन के सही मार्ग पर स्थिर रहने की शक्ति
उन्होंने आगे बताया कि निष्कपट भाव से गुरु की सेवा और उनके उपदेशों का अक्षरशः पालन करने से मनुष्य के भीतर विनम्रता, संयम और सद्विचार का तेजी से विकास होता है. ध्यान-साधना के माध्यम से मन को पूरी तरह एकाग्र कर आत्मचिंतन की ओर बढ़ना चाहिए. सत्संग मनुष्य को जीवन का सही और कल्याणकारी मार्ग दिखाता है, जबकि ध्यान उस मार्ग पर अडिग और स्थिर रहने की आंतरिक शक्ति प्रदान करता है. नियमित साधना करने से मन की चंचलता कम होती है और व्यक्ति अपने दैनिक आचरण में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है.
आश्रम के संरक्षक सह प्रभारी स्वामी परमानंद जी महाराज ने शिविर की व्यवस्थाओं की जानकारी देते हुए बताया कि इस सात दिवसीय शिविर का शेड्यूल बेहद कड़ा और अनुशासित था. प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त में सुबह 2:45 बजे जागरण के साथ कार्यक्रम की शुरुआत होती थी. इसके बाद ध्यान, सत्संग, भोजन एवं विश्राम का निर्धारित क्रम चलता रहा. प्रतिदिन सुबह 6:00 से 8:00 बजे तक तथा दोपहर 3:00 से शाम 5:00 बजे तक मुख्य सत्संग का आयोजन किया जाता था. इसके अलावा शाम और रात्रि के समय भी ध्यान एवं सत्संग का क्रम लगातार जारी रहता था.
ग्रामीणों और सेवादारों की रही सराहनीय भूमिका
इस बड़े आध्यात्मिक आयोजन और सात दिवसीय ध्यान-साधना शिविर को पूरी तरह सफल और सुव्यवस्थित बनाने में स्थानीय ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर अपना योगदान दिया. इसमें मुख्य रूप से सुदर्शन शाह, बटेश्वर शाह, कंचन शाह, अमोल चंद पंडित, बहादुर शाह, बसंत पंडित, राधेश्याम शाह, राजा रजक सहित अन्य ग्रामीणों की भूमिका बेहद सराहनीय और अनुकरणीय रही.



