रांची के लक्ष्मी निवास कोठी में कृषि संग्रहालय लगभग बनकर तैयार है, जिसका लोकार्पण 15 नवंबर को राज्य स्थापना दिवस पर होने की उम्मीद है। यह संग्रहालय झारखंड की प्राचीन से आधुनिक कृषि परंपराओं और तकनीकों को प्रदर्शित करेगा, जो राज्य का पहला ऐसा केंद्र होगा।
रांची। रांची के कांके रोड स्थित कृषि भवन के पास कृषि संग्रहालय लगभग बनकर तैयार है। 15 नवंबर को इसके लोकार्पण की तैयारी है। इस संग्रहालय में प्राचीन कृषि से लेकर वर्तमान कृषि तक हुए बदलाव के उपकरण रखे जाएंगे।
पठारी क्षेत्र में सीढ़ीदार खेत बनाकर खेती, खेती के साथ पशुपालन से किसानों के आर्थिक विकास और पाली हाउस खेती के कई माडल भी तैयार किए जा रहे हैं। लोग यहां आकर झारखंड के कृषि इतिहास के साथ आधुनिक कृषि की कई जानकारियां प्राप्त कर पाएंगे।
रांची। रांची के कांके रोड स्थित कृषि भवन के पास कृषि संग्रहालय लगभग बनकर तैयार है। 15 नवंबर को इसके लोकार्पण की तैयारी है। इस संग्रहालय में प्राचीन कृषि से लेकर वर्तमान कृषि तक हुए बदलाव के उपकरण रखे जाएंगे।
पठारी क्षेत्र में सीढ़ीदार खेत बनाकर खेती, खेती के साथ पशुपालन से किसानों के आर्थिक विकास और पाली हाउस खेती के कई माडल भी तैयार किए जा रहे हैं। लोग यहां आकर झारखंड के कृषि इतिहास के साथ आधुनिक कृषि की कई जानकारियां प्राप्त कर पाएंगे। इस संबंध में कृषि निदेशक विद्यानंद शर्मा पंकज ने बताया कि कृषि निदेशालय भवन के ठीक पीछे वाले लक्ष्मी निवास कोठी में कृषि संग्रहालय बनाने का काम तेजी से चल रहा है। हालांकि लोकार्पण की तिथि अभी निर्धारित नहीं हुई है, लेकिन राज्य स्थापना दिवस यानी 15 नवंबर को इसका लोकार्पण विभागीय मंत्री या मुख्यमंत्री से कराए जाने की उम्मीद है।
कृषि निदेशालय परिसर में निर्माणाधीन इस म्यूजियम के अंदर आर्गेनिक फार्मिंग, इंटीग्रेटेड फार्मिंग, आर्गेनिक खाद बनाने की तकनीक, पालीहाउस फार्मिंग और ड्रिप इरिगेशन सहित कई माडल बनाए जा रहे हैं। कृषि निदेशक ने बताया कि संग्रहालय में प्रवेश करते ही वेस्टेज धातु से अन्नदाता की प्रतिमा दिखाई देगी। इसमें गेहूं की बाली और कृषि औजारों के साथ किसान का प्रारूप तैयार किया जा रहा है, जो पूरा होने पर बेहद आकर्षक लगेगा।
झारखंड की राजधानी रांची में कृषि निदेशालय परिसर की लक्ष्मी निवास कोठी में बन रहा यह संग्रहालय राज्य का पहला कृषि संग्रहालय होगा, जो कृषि विज्ञान की पढ़ाई करने वाले छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए भी यह बेहद उपयोगी साबित होगा।



