जमशेदपुर: महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के चिमूर में आयोजित आदिवासी राष्ट्रीय महासम्मेलन में झारखंड के पूर्व विधायक और ‘दरबार’ संगठन के संस्थापक सूर्यसिंह बेसरा को सर्वसम्मति से ‘आदिवासी धर्मगुरु’ की उपाधि दी गयी। विश्वनाथ वाकड़े की अध्यक्षता में हुए इस महासम्मेलन में सूर्यसिंह बेसरा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में प्रेम शाही मुंडा और भुवन सिंह कोर्राम विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहे।
सम्मेलन में महाराष्ट्र के साथ-साथ मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात और झारखंड समेत कई राज्यों से 1,000 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान आदिवासी समाज के अधिकार, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक व राजनीतिक चुनौतियों से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

पांच संगठनों को सौंपी गयी राष्ट्रीय अभियान की जिम्मेदारी
महासम्मेलन के दौरान आदिवासी समाज में एकजुटता मजबूत करने और राष्ट्रीय स्तर पर पुनर्जागरण अभियान को आगे बढ़ाने के लिए पांच प्रमुख संगठनों को जिम्मेदारी दी गयी। इनमें ‘दरबार’, ‘को-ऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ आदिवासी पॉलिटिकल पार्टीज’, ‘नेशनल ट्राइबल यूथ एंड स्टूडेंट्स फेडरेशन’, ‘नेशनल ट्राइबल एडवाइजरी काउंसिल’ और ‘नेशनल ट्राइबल विमेंस ऑर्गनाइजेशन’ शामिल हैं।
इन संगठनों के माध्यम से देश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले आदिवासी समुदायों को साझा मंच से जोड़ने, उनकी सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने और सामाजिक एवं राजनीतिक अधिकारों के लिए सामूहिक रूप से आवाज उठाने की योजना तैयार की गयी है।
दिसंबर में दिल्ली में होगा राष्ट्रीय आदिवासी अधिवेशन
महासम्मेलन में यह निर्णय भी लिया गया कि संगठनात्मक ढांचे और सम्मेलन में पारित प्रस्तावों को अंतिम रूप देने के लिए दिसंबर में दिल्ली में ‘राष्ट्रीय आदिवासी अधिवेशन’ आयोजित किया जाएगा। इसके लिए देश के सभी 28 राज्यों और आठ केंद्र शासित प्रदेशों से प्रतिनिधियों की संयोजित मंडली का गठन और मनोनयन किया जाएगा।
दिल्ली में प्रस्तावित अधिवेशन में आदिवासी समाज से जुड़े प्रमुख मुद्दों और मांगों के साथ संगठन की भावी रूपरेखा पर चर्चा होगी। इसके बाद इन मांगों और प्रस्तावों को केंद्र सरकार के समक्ष प्रमुखता से रखने की तैयारी की जाएगी।



