राजधानी रांची में अपार्टमेंट में बेडवाइज या शार्ट स्टे पर किराए पर देना अवैध है, जिससे नशा पार्टियों और अनैतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिल रहा है। हाई कोर्ट के अधिवक्ता अभय कुमार मिश्रा ने पुलिस और नगर निगम से इस पर कार्रवाई करने की मांग की है, क्योंकि ऐसे मामलों में कोई पंजीकरण या सत्यापन नहीं होता।
रांची। राजधानी रांची में इन दिनों एक नया कल्चर काफी तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें किसी अपार्टमेंट में शार्ट स्टे या बेड के हिसाब से किराया लिया जा रहा है। इसमें पुलिस की ओर से कोई कार्रवाई हो रही है और न रांची नगर निगम की ओर से सुध ली जा रही है।
हाई कोर्ट के अधिवक्ता अभय कुमार मिश्रा ने कहा कि तेजी से बढ़ता यह कल्चर छात्रों और छात्राओं के लिए घातक बनता जा रहा है। इसके लिए पुलिस और नगर निगम को कार्रवाई करनी चाहिए। क्योंकि किसी भी अपार्टमेंट में शार्ट स्टे या बेड के हिसाब से किराएदार रखने के लिए निगम में पंजीयन कराना होगा। लेकिन अधिकांश मामलों में कोई निबंधन नहीं है। जिसकी वजह से थर्ड पार्टी के जरिए मोबाइल एप से अल्पकालिक अवधि के लिए अपार्टमेंट बुक हो रहा है। जहां पर जमकर नशा पार्टी हो रही है। इसका खामियाजा पड़ोसियों को उठना पड़ रहा है।पुलिस और नगर निगम में करें शिकायत
अधिवक्ता अभय कुमार मिश्रा ने कहा कि जहां पर अवैध कार्य होता है, वहां पुलिस की ओर से कार्रवाई करनी चाहिए। जिस अपार्टमेंट की सोसाइटी में ऐसी कोई अनैतिक गतिविधि होती है, तो इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह सब कानून की पकड़ से बाहर होने के लिए शातिर गिरोह नए-नए रास्ते ढूंढ रहा है। क्योंकि अगर किसी को होटल में जाना है, तो वहां पर दोनों को आधारकार्ड, पैनकार्ड और रजिस्ट्रर में पूरा विवरण दर्ज करना पड़ता है।
इसके अलावा उन्हें सीसीटीवी कैमरे से भी बचना पड़ता है। लेकिन अपार्टमेंट के किसी प्लैट को कुछ समय के लिए लेने के दौरान उसे कोई आइडी नहीं देनी पड़ती है। साथ ही वह उस अपार्टमेंट में नशा सहित कुछ भी सकता है, जिसे रोकने वाला कोई नहीं है।मोबाइल एप से बुक हो रहा फ्लैट
अधिवक्ता अभय कुमार मिश्रा ने लालपुर में हुए मेडिकल छात्रा रेपकांड का जिक्र करते हुए कहा कि जिस सोसाइडी में यह कांड हुआ है, उसे एक मोबाइल एयरबीएनबी एप से बुकिंग हुई थी। इसके जरिए स्थानीय स्तर पर निजी मकान और फ्लैट आसानी से मिल जाते हैं।

इसमें कोई वैरिफिकेशन की जरूरत भी नहीं पड़ती है। पैसे कमाने की लालाच में कुछ फ्लैट मालिक इस एप में रजिस्टर करते हैं। इसके अलावा थर्ड पार्टी के जरिए गेस्ट हाउस और रेस्ट हाउस के रूप में मकान मालिक से एग्रीमेंट किया जाता है।
मेडिकल छात्रा के रेपकांड का जिक्र करते हुए कहा कि इस कांड में फ्लैट थर्ड पार्टी के साथ एग्रीमेंट था, जिसे गेस्ट हाउस के रूप में लिया गया था। इस मामले में न तो पुलिस ने कोई कार्रवाई की और न ही नगर निगम ने उस फ्लैट अवैध इस्तेमाल को लेकर कोई कार्रवाई की है। हालांकि मामला अभी कोर्ट में लंबित है।
छात्रावास, धर्मशाला, गेस्ट हाउस और कुत्ते तक का पंजीयन
हाई कोर्ट के अधिवक्ता अभय कुमार मिश्रा ने कहा कि रांची नगर निगम क्षेत्र में आने वाले छात्रावास, धर्मशाला, गेस्ट हाउस और कुत्ते तक का पंजीयन कराया गया है। लेकिन इस तरह के फलते फूलते धंधे पर न तो नगर निगम की नजर है और न ही पुलिस की।
म्यूनिसिपल एक्ट और आइपीसी धारा 188 के तहत पुलिस को कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि क्या इसकी जानकारी निगम या पुलिस अधिकारियों नहीं है, ऐसा हो ही नहीं सकता है। लेकिन नशे के धंधे को बढ़ावा देने के लिए इस तरह का कल्चर काफी तेजी से बढ़ रहा है। जिसको रोकना होगा।
अन्यथा मेडिकल छात्रा रेपकांड जैसे कई मामले सामने आएंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ओर से कई कानून बनाए गए हैं, लेकिन सही से उसका क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। स्कूल के एक किमी दूरी तक सिगरेट, गुटखा सहित अन्य नशे की दुकानें नहीं होनी चाहिए। लेकिन हर स्कूल के पास आपको सिगरेट और गुटखा की दुकान खुलेआम मिल जाएंगे।



