रांची के मांडर स्थित बूढ़ाखुखरा में 15.01 करोड़ रुपये की लागत से बने 5000 मीट्रिक टन क्षमता वाले कोल्ड स्टोरेज का उद्घाटन हुआ. मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने किसानों को 1.04 करोड़ रुपये के कृषि संसाधन भी वितरित किये.
रांची: झारखंड के रांची जिले के किसानों की उपज सुरक्षित रखने, फसलों की बर्बादी कम करने और कृषि उत्पादों का बेहतर मूल्य दिलाने के उद्देश्य से सोमवार को मांडर प्रखंड के बूढ़ाखुखरा में 5000 मीट्रिक टन क्षमता वाले आधुनिक कोल्ड स्टोरेज की शुरुआत की गई है. कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने शीतगृह के साथ 100 किलोवाट क्षमता वाले सोलर पावर प्लांट का भी उद्घाटन किया. इस अवसर पर सहकारी समितियों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को कृषि उत्पादों के परिवहन और विपणन के लिए 1 करोड़ 4 लाख 50 हजार रुपये की परिसंपत्तियां वितरित की गयीं.
दो एकड़ जमीन पर तैयार की गई बिल्डिंग
बूढ़ाखुखरा में दो एकड़ जमीन पर करीब 15.01 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक कोल्ड स्टोरेज का निर्माण किया गया है. इसमें फ्रेऑन गैस आधारित रेफ्रिजरेशन तकनीक और मल्टी-चेंबर व्यवस्था की सुविधा है. फलों और हरी सब्जियों के सुरक्षित भंडारण के लिए 125-125 मीट्रिक टन क्षमता वाले दो अलग-अलग चैंबर भी बनाये गये हैं. कोल्ड स्टोरेज के संचालन की जिम्मेदारी बेंगलुरु की मेसर्स रेडवुड होल्डिंग्स एंड रियल्टी सर्विसेज एलएलपी को दी गयी है. कोल्ड स्टोरेज के बिजली मुहैया कराने के लिए 100 किलोवाट क्षमता का सोलर पावर प्लांट स्थापित किया गया है. इससे किसानों को अपनी उपज सुरक्षित रखने और बाजार में अनुकूल कीमत मिलने तक उसके भंडारण में मदद मिलेगी.
2018 में शुरू की गई थी परियोजना
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि बूढ़ाखुखरा कोल्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई थी, लेकिन कोरोना महामारी समेत विभिन्न कारणों से इसका काम अधूरा रह गया. वर्ष 2022 में विधायक बनने के बाद उन्होंने परियोजना की स्थिति का जायजा लिया और इसे पूरा कराने के लिए प्रयास शुरू किये. वर्ष 2024 में कृषि मंत्री की जिम्मेदारी मिलने के बाद उन्होंने परियोजना की फाइल निकलवायी और इसे पूरा करने के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करायी. उन्होंने बताया कि शीतगृह को आधुनिक तकनीक के अनुरूप विकसित करने के लिए करीब छह करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश की आवश्यकता थी. इसके बाद मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्ताव रखा गया. संबंधित अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों और एजेंसियों के साथ समन्वय कर परियोजना को पूरा कराया गया.
किसानों की उपज सुरक्षित रखना प्राथमिकता: शिल्पी
मंत्री ने कहा कि किसान की पहचान उसकी जाति, धर्म या लिंग से नहीं, बल्कि उसकी मेहनत और संघर्ष से होती है. छोटा हो या बड़ा, हर किसान का परिश्रम सम्मान का अधिकारी है. किसानों के हित में इस महत्वपूर्ण परियोजना को पूरा कराना उनके लिए गर्व की बात है. उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता किसानों की मेहनत और उपज को सुरक्षित रखने के साथ उनकी आय बढ़ाने के अवसर विकसित करना है. कृषि क्षेत्र में आधारभूत संरचनाओं का वास्तविक लाभ किसानों तक पहुंचना चाहिए, ताकि उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके.
समितियों और एफपीओ को मिले वाहन
कार्यक्रम में बेजफेड से संबद्ध सहकारी समितियों और एफपीओ को कुल 1.045 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियां दी गयीं. इनमें नौ पिकअप वाहन, दो मिनी ट्रक और दो मोबाइल वेंडिंग कार्ट शामिल हैं. इन संसाधनों से कृषि उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने, विपणन व्यवस्था मजबूत करने और बिचौलियों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा विभिन्न विभागों के माध्यम से भी परिसंपत्तियां वितरित की गयीं. झारक्राफ्ट ने 78.849 लाख रुपये, जिला पशुपालन कार्यालय ने 2.48 लाख रुपये, भूमि संरक्षण कार्यालय ने 20 लाख रुपये की परिसंपत्तियां प्रदान की गयीं.
कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित
कार्यक्रम में पशुपालन निदेशक रोबिन टोप्पो, मत्स्य निदेशक अमरेन्द्र कुमार, निदेशक निसा अभिजीत कर, वेजफेड के प्रबंध निदेशक अभिनव मिश्रा, भूमि संरक्षण निदेशक विकास कुमार, समेति निदेशक रमाशंकर सिंह, गव्य निदेशक डॉ संजीव कुमार सहित मांडर के अंचलाधिकारी और विभिन्न विभागों के पदाधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे. इस दौरान टांगरबसली बाजार शेड का भी उद्घाटन किया गया.



