मधुबनी । मां की ममता, इंसानियत, उम्मीद और इंटरनेट मीडिया का सेतु। इत्तेफाक और संयोग से आगे भाई का भाई और माता-पिता का बेटे से मिलन का सुखद अनुभव, जहां भावनाओं और भाव-विह्वलता की दुनिया में आंखें ही बोल-बतिया रही थीं।
यहां 22 वर्षों में थक चुकीं मां की आंखों में उम्मीद का उजास था तो झुक चुके पिता के कंधे चौड़े से थे। मां, भाई, बहन सब निहाल थे। गांव की गलियां खुशहाल थीं। जिसे बचपने में देखा था, आज लौट आया… अब यहीं उसकी दुनिया है, जो छूट गई थी। मधुबनी के झंझारपुर प्रखंड के महेशपुरा गांव में बुधवार का दिन यादगार बन गया। करीब 22 साल पहले बिछड़ा घर का लाल लौटा 70 वर्षीय बूढ़ी मां लक्ष्मी देवी बिलख पड़ीं। 15 साल की उम्र में बिछड़े बेटे पर लाड़ लुटाती मां विह्वल होती रहीं।
महेशपुरा निवासी समाजसेवी आचार्य ललित शास्त्री उर्फ ललित ऋषिदेव के सबसे छोटे भाई और राजेंद्र महतो के पुत्र शंकर कुशवाहा तीन भाइयों में सबसे छोटे हैं। उनकी दो बहनें भी हैं।
स्वजन बताते हैं कि दिमागी रूप से कमजोर होने के कारण 22 साल पहले 15 साल की उम्र में वे घर से लापता हो गए थे। स्वजन ने काफी तलाश की, लेकिन सुराग नहीं मिला। घरवालों की उम्मीद धीरे-धीरे धूमिल होती रही, लेकिन मां का इंतजार खत्म नहीं हुआ। ग्वालियर रेलवे स्टेशन से स्वर्ग सदन तक का सफर
किस्मत ने शंकर को मध्य प्रदेश के ग्वालियर पहुंचा दिया था। पिछले आठ वर्षों से वो ग्वालियर के अनाथ आश्रम ‘आश्रम स्वर्ग सदन’ में रह रहे थे। संस्था के संचालक विकास गोस्वामी और पवन सूर्यवंशी ने उन्हें ग्वालियर रेलवे स्टेशन पर बीमार और लाचार अवस्था में पाया था, वहीं से अपने आश्रम लेकर आए थे। आश्रम में महीनों इलाज चला, जिसके बाद वे स्वस्थ हो पाए। ठीक होने के बाद वे आश्रम में ही रुक गए और संस्था संचालकों के साथ सेवाकार्य में हाथ बंटाने लगे।
एक प्रसारित वीडियो बना मिलन का सेतु
ललित शास्त्री बताते हैं कि बिछड़े भाई से मिलाने में इंटरनेट मीडिया मददगार बना। ग्वालियर में तैनात डीएसपी संतोष कुमार पटेल ने इंटरनेट मीडिया हैंडल पर आश्रम में रहने वाले लोगों का एक वीडियो पोस्ट किया था। वह वीडियो प्रसारित होते-होते मधुबनी के झंझारपुर तक पहुंच गया।
वीडियो में शंकर को देखते ही स्वजन ने पहचान लिया और तत्काल डीएसपी और संस्था से फोन पर संपर्क साधा। बात पक्की होते ही ललित ग्वालियर के लिए रवाना हो गए। आश्रम में भाई को सही-सलामत देखना उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद वे अपने भाई को लेकर गांव लौटे।
गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने ढोल-नगाड़े के साथ शंकर का स्वागत किया। माला पहने शंकर को देखने के लिए पूरे गांव की गलियां उमड़ पड़ीं। वर्षों बाद लौटे बेटे को देख बूढ़ी मां ने सीने से लगा लिया, तो पिता की आंखें भी नम हो गईं। मौके पर मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं। ग्रामीण कह रहे थे कि इंटरनेट मीडिया ने एक बिछड़े परिवार को फिर से जोड़ दिया।



