सदर अस्पताल की पैथोलॉजी लैब का लिया जायजा, कर्मियों को दिया विशेष प्रशिक्षण
साहिबगंज। वर्ष 2026 तक भारत को कालाजार मुक्त बनाने के लक्ष्य को लेकर सोमवार को आईसीएमआर की टीम साहिबगंज पहुंची। टीम में केंद्रीय एवं राज्य स्तर के विशेषज्ञों के साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सदस्य भी शामिल थे। टीम का नेतृत्व डॉ. मिताली चटर्जी ने किया।
टीम में शामिल डॉ. सूर्या ज्योति चौधरी, सुतापा राय और शिशिर कुंडू ने सदर अस्पताल का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पैथोलॉजी लैब की व्यवस्था, कालाजार की जांच प्रक्रिया तथा जांच से जुड़े विभिन्न बिंदुओं की जानकारी ली। मौके पर सिविल सर्जन डॉ. रामदेव पासवान भी मौजूद रहे।
केस की सही पहचान पर दिया जोर:

निरीक्षण के बाद आईसीएमआर की टीम ने पैथोलॉजी लैब से जुड़े कर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया। सिविल सर्जन डॉ. रामदेव पासवान ने बताया कि कालाजार के निदान में कभी-कभी कुछ मामलों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। ऐसे में जांच कर्मियों को प्रशिक्षित करने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी संभावित कालाजार का मामला जांच के दौरान छूट न जाए।
उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण के बाद कर्मियों को कालाजार के साथ-साथ लेप्रोसी और केपीडीएल जैसे मामलों में भी अंतर स्पष्ट करने में मदद मिलेगी।
साहिबगंज की लैब को बताया उत्कृष्ट उदाहरण:
आईसीएमआर टीम की लीड डॉ. मिताली चटर्जी ने बताया कि कालाजार मुक्त भारत अभियान के तहत यह कार्यशाला आयोजित की गई है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों से इस दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और लक्ष्य है कि 2026 तक भारत को कालाजार मुक्त किया जाए।
उन्होंने साहिबगंज सदर अस्पताल की पैथोलॉजी लैब की व्यवस्था की सराहना करते हुए कहा कि यहां जांच की बेहतर सुविधा उपलब्ध है। कालाजार प्रभावित क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण जांच के लिए ऐसी लैब का होना बेहद जरूरी है। उन्होंने साहिबगंज की लैब को देश के बड़े शहरों को छोड़कर एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया।



