रांची: दुर्गा पूजा को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए रांची जिला प्रशासन ने पूजा समितियों और आयोजकों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने पंडाल की सुरक्षा, बिजली और अग्नि सुरक्षा, श्रद्धालुओं की आवाजाही, भीड़ नियंत्रण से लेकर विसर्जन तक के लिए जरूरी नियम तय किए हैं। सभी पूजा समितियों से इन निर्देशों का सख्ती से पालन करने और पुलिस-प्रशासन का सहयोग करने की अपील की गयी है।
पंडाल निर्माण में सुरक्षा मानकों का पालन जरूरी
जारी गाइडलाइन के मुताबिक पंडाल और प्रवेश द्वार का निर्माण मकान, गैस गोदाम, ट्रांसफॉर्मर, बिजली के तार, रेलवे लाइन और हाईटेंशन लाइन से उचित दूरी बनाकर करना होगा। पंडाल में ज्वलनशील या सिंथेटिक कपड़ों के इस्तेमाल पर रोक रहेगी। महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास द्वार बनाने होंगे। इसके अलावा किसी भी आपात स्थिति में लोगों के सुरक्षित बाहर निकलने के लिए वैकल्पिक निकास की व्यवस्था भी अनिवार्य होगी।
पंडाल की मजबूती सुनिश्चित करने के लिए भवन निर्माण विभाग के संबंधित अभियंताओं के निर्देशों का पालन करना होगा और आवश्यक प्रमाण-पत्र लेना होगा। बिजली व्यवस्था में सुरक्षित वायरिंग और अर्थिंग के साथ अलग विद्युत नियंत्रण कक्ष की व्यवस्था करनी होगी। विद्युत सजावट केवल स्वीकृत विद्युत भार के अनुरूप कनेक्शन लेकर ही की जा सकेगी। जनरेटर को भी पंडाल से उचित दूरी पर सुरक्षित स्थान पर रखा जाना जरूरी होगा।
अग्निशमन और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था अनिवार्य
प्रशासन ने पंडाल के अंदर और आसपास ज्वलनशील सामग्री नहीं रखने का निर्देश दिया है। हर पंडाल में अग्निशमन यंत्र, पानी और सूखी बालू से भरी बाल्टियां उपलब्ध रखनी होंगी। साथ ही प्राथमिक उपचार की सुविधा भी सुनिश्चित करनी होगी। अग्निशमन विभाग के अधिकारियों के निर्देशों का पालन करते हुए संबंधित समितियों को फायर सेफ्टी की एनओसी भी प्राप्त करनी होगी।
रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर नहीं बजेगा
ध्वनि प्रदूषण पर प्रशासन ने विशेष सख्ती दिखाई है। नियम के तहत रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर या ध्वनि विस्तारक यंत्र का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। निर्धारित सीमा से अधिक तेज आवाज में साउंड सिस्टम चलाने पर भी रोक रहेगी।
पंडाल परिसर और आसपास पर्याप्त संख्या में सीसीटीवी कैमरे लगाने तथा उनकी लगातार निगरानी की व्यवस्था करने को कहा गया है।
समितियों को तैनात करने होंगे स्वयंसेवक
पूजा समितियों को अपने स्तर पर पर्याप्त संख्या में स्वयंसेवक नियुक्त करने होंगे। सभी स्वयंसेवकों को पहचान पत्र देना होगा और उनकी सूची संबंधित थाना प्रभारी को उपलब्ध करानी होगी। खाद्य सामग्री की दुकानें या फूड स्टॉल पंडाल से उचित दूरी पर और सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बाद ही लगाए जा सकेंगे।
पूजा मार्ग पर दुकानदारों को इस तरह दुकान लगाने की अनुमति नहीं होगी जिससे लोगों के आवागमन में परेशानी हो। श्रद्धालुओं के साथ दुर्व्यवहार रोकने के लिए भी समितियों को सतर्क रहना होगा। भीड़ में छिनतई या पॉकेटमारी करते पकड़े जाने वाले व्यक्ति को तत्काल पुलिस के सुपुर्द करने का निर्देश दिया गया है।
सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर नजर
प्रशासन ने सोशल मीडिया और व्हाट्सऐप के जरिए अफवाह या आपत्तिजनक सामग्री प्रसारित नहीं करने की हिदायत दी है। किसी संदिग्ध पोस्ट या भ्रामक सूचना की जानकारी मिलने पर उसे आगे बढ़ाने के बजाय तुरंत पुलिस या प्रशासन को सूचित करने को कहा गया है।
तय मार्ग और घाट से ही होगा विसर्जन
दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन प्रशासन द्वारा निर्धारित तारीख, समय और मार्ग के अनुसार ही किया जाएगा। इसके लिए केवल चिन्हित घाटों का इस्तेमाल करना होगा। बड़ी गाड़ियों या बसों की छत पर लोगों के बैठने तथा वाहनों पर अत्यधिक ऊंची सामग्री लगाने की अनुमति नहीं होगी। वाहनों की कुल ऊंचाई 4 मीटर से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।
पूजा समितियों को प्रशासन की ओर से समय-समय पर जारी होने वाले अन्य निर्देशों का भी पालन करना होगा, ताकि त्योहार के दौरान कानून-व्यवस्था और शांति बनी रहे।
श्रद्धालुओं की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिकता : डीसी
रांची डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि दुर्गा पूजा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुचारु आवागमन जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने पूजा समितियों से पंडाल निर्माण, विद्युत व्यवस्था और अग्नि सुरक्षा से जुड़े सभी मानकों का गंभीरता से पालन करने की अपील की। साथ ही भीड़ प्रबंधन, सीसीटीवी निगरानी, ध्वनि नियंत्रण और विसर्जन के तय नियमों का पालन करते हुए पुलिस एवं प्रशासन को सहयोग देने को कहा, ताकि दुर्गा पूजा सुरक्षित और शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो सके।



