गढ़वा: जिले के जंगलों में बाघ की मौजूदगी के संकेत मिलने के बाद वन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। जंगल में वनकर्मियों को बाघ के पगमार्क मिले हैं, जिसके बाद संबंधित क्षेत्रों में ट्रैकिंग शुरू कर दी गयी है। बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए जंगल में कई स्थानों पर कैमरा ट्रैप भी लगाए गए हैं। पलामू टाइगर रिजर्व से सटे रमकंडा और भंडरिया समेत आसपास के वन क्षेत्रों में बाघ की मौजूदगी को लेकर ग्रामीणों को सतर्क किया गया है।
कैमरा ट्रैप से बाघ की गतिविधियों पर नजर
गढ़वा जिले के पलामू टाइगर रिजर्व से लगे रंका, रमकंडा, भंडरिया और बड़गड़ प्रखंडों के जंगलों में वन विभाग विशेष निगरानी कर रहा है। वनकर्मियों को जंगल में बाघ के पगमार्क मिलने के साथ ही पहले मवेशियों के शिकार के भी कुछ प्रमाण मिले थे। इन संकेतों के आधार पर वन विभाग ने बाघ की मौजूदगी की पुष्टि की है।
बाघ की आवाजाही वाले संभावित इलाकों में पेड़ों और अन्य रणनीतिक स्थानों पर कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं। इनके जरिए बाघ की गतिविधियों को रिकॉर्ड करने और उसकी लोकेशन का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
सुबह-शाम जंगल जाने से बचें : डीएफओ
गढ़वा के डीएफओ एबीन बेनी अब्राहम ने बताया कि रंका, भंडरिया, बड़गड़ और रमकंडा क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी की जानकारी मिली थी। पगमार्क की जांच के बाद इसकी पुष्टि की गयी है। हालांकि, अभी तक बाघ कैमरा ट्रैप में नजर नहीं आया है।
वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे विशेषकर सुबह और शाम के समय जंगल की ओर न जाएं। बिना जरूरी काम के जंगल में प्रवेश करने से भी बचने की सलाह दी गयी है। इसके अलावा किसी ग्रामीण को बाघ की गतिविधि, पगमार्क या अन्य संदिग्ध संकेत दिखाई दें तो इसकी सूचना तत्काल वन विभाग को देने को कहा गया है।



