आजादी के 80 साल बाद भी अमडाबेडो-रानीडीह गांव सड़क से महरूम, एंबुलेंस पहुंचने का रास्ता नहीं
साहिबगंज/मंडरो। एक ओर सरकार गांव-गांव तक सड़क और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के दावे कर रही है, वहीं साहिबगंज जिले के मंडरो प्रखंड में सड़क के अभाव की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो विकास के दावों पर सवाल खड़े करती है। खैरवा पंचायत के अमडाबेडो से रानीडीह गांव तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण शुक्रवार को बीमार महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को खाट को ही एंबुलेंस बनाना पड़ा। परिजन और ग्रामीण मरीज को खाट की डोली पर लादकर करीब चार से पांच किलोमीटर तक दुर्गम रास्ते से पैदल ले गए।
एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंची, खाट पर मरीज को ले जाने की मजबूरी:
अमडाबेडो गांव निवासी सुरजी पहाड़िन की शुक्रवार की अहले सुबह तबीयत बिगड़ गई। गांव तक सड़क नहीं होने के कारण एंबुलेंस के पहुंचने में परेशानी हुई। इसके बाद ग्रामीणों ने खाट में रस्सी बांधकर और बांस के सहारे डोली तैयार की। मरीज को इसी के सहारे पैदल ले जाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया गया, जहां से आगे वाहन की मदद से अस्पताल ले जाने की व्यवस्था की गई।
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में किसी के बीमार पड़ने, गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाने या दुर्घटना होने की स्थिति में यही खाट उनकी मजबूरी का एंबुलेंस बन जाती है। बरसात में कच्चे और कीचड़ भरे रास्ते के कारण परेशानी और बढ़ जाती है।
स्वास्थ्य सेवा की व्यवस्था है, लेकिन सड़क के बिना बेअसर:
सरकार और स्वास्थ्य विभाग की ओर से ग्रामीण मरीजों को अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाता है, लेकिन सड़क नहीं होने के कारण वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाता। ऐसे में समय पर इलाज मिलने में देरी का खतरा बना रहता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गांव तक पक्की सड़क बनवाने की मांग की है। उनका कहना है कि जब आसपास के क्षेत्रों में सड़क निर्माण हो रहा है, तो जनजातीय बहुल इन गांवों को अब तक सड़क सुविधा से क्यों नहीं जोड़ा गया। आजादी के 80 साल बाद भी मरीज को खाट पर अस्पताल ले जाने की मजबूरी विकास की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े करती है।



