डीएमके और एआईएडीएमके समेत कई दलों ने बनाई दूरी, बैठक में केवल 20 सांसदों के शामिल होने की उम्मीद
चेन्नई। तमिलनाडु में प्रस्तावित परिसीमन को लेकर मुख्यमंत्री सी. विजय द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय सांसदों की बैठक को बड़ा झटका लगा है। राज्य के कुल 57 सांसदों में से 37 सांसदों ने बैठक से दूरी बनाने का फैसला किया है। ऐसे में केवल 20 सांसदों के बैठक में शामिल होने की संभावना है।
बैठक का उद्देश्य प्रस्तावित परिसीमन विधेयक 2026 और उसके तमिलनाडु पर संभावित प्रभाव को लेकर राज्य की एकजुट रणनीति तैयार करना है। दक्षिणी राज्यों में इस बात को लेकर चिंता जताई जा रही है कि परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों के पुनर्विन्यास से इन राज्यों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है।
डीएमके के सभी 30 सांसद बैठक से रहेंगे दूर
बैठक का सबसे बड़ा बहिष्कार सत्तारूढ़ डीएमके की ओर से किया गया है। पार्टी के सभी 30 सांसदों के बैठक में शामिल नहीं होने की बात कही गई है। वहीं, मुख्य विपक्षी दल एआईएडीएमके के चार सांसद भी बैठक से दूरी बनाएंगे।
इसके अलावा पीएमके, एमएनएम और डीएमडीके के एक-एक सांसद के भी बैठक में शामिल नहीं होने की जानकारी सामने आई है।
कांग्रेस और सहयोगी दलों के सांसद होंगे शामिल
बैठक में शामिल होने वाले सांसदों में कांग्रेस और उसके छोटे सहयोगी दलों के सांसद प्रमुख रूप से शामिल हैं। वीसीके, सीपीआई और सीपीआई(एम) के सांसदों के अलावा एमडीएमके और आईयूएमएल के प्रतिनिधियों के भी बैठक में शामिल होने की संभावना है।
कावेरी विवाद को लेकर भी सियासी घमासान
बैठक का बहिष्कार करने वाले नेताओं ने आरोप लगाया है कि सरकार परिसीमन के मुद्दे के जरिए कावेरी जल विवाद से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।
डीएमके सांसद कनिमोझी ने बैठक को अनावश्यक बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार की ओर से संसद के मौजूदा सत्र में परिसीमन विधेयक पेश किए जाने को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। उनका कहना है कि संशोधित मसौदा भी उपलब्ध नहीं है, ऐसे में बैठक में चर्चा के लिए नया क्या है।
कावेरी जल विवाद लंबे समय से तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच विवाद का विषय रहा है। फिलहाल कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेदाटु जल परियोजना को लेकर दोनों राज्यों के बीच मतभेद फिर से चर्चा में हैं।
मानसून सत्र में विधेयक पेश किए जाने की अटकलें
परिसीमन विधेयक को लेकर केंद्र सरकार की ओर से आगे बढ़ने की संभावनाओं के बीच अटकलें तेज हैं कि इसे आगामी मानसून सत्र में फिर से पेश किया जा सकता है। ऐसी भी चर्चा है कि स्वतंत्रता दिवस के बाद संसद का विशेष तीन दिवसीय सत्र बुलाकर विधेयक पर आगे की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
मुख्यमंत्री की ओर से बुलाई गई बैठक में लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों के साथ प्रस्तावित परिसीमन विधेयक 2026 पर चर्चा कर तमिलनाडु के हितों को लेकर साझा रणनीति बनाने की योजना थी। हालांकि, बड़ी संख्या में सांसदों के बैठक से दूर रहने से राज्य में इस मुद्दे पर राजनीतिक मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।




