23 नवंबर को डीआरएम कार्यालय मालदा में संघ रखेगा मजदूरों का पक्ष, प्रबंधन ने आरोपों को नकारा
साहिबगंज। सकरीगली रेलवे रैक साइडिंग में मजदूरी और बुनियादी सुविधाओं को लेकर मजदूरों तथा स्टोन प्रबंधन के बीच विवाद गहराता जा रहा है। मजदूरों ने निर्धारित मजदूरी नहीं देने, प्रबंधन के प्रतिनिधियों पर दुर्व्यवहार करने और कार्यस्थल पर पेयजल, बिजली व शौचालय की व्यवस्था नहीं होने की शिकायत की है। इसे लेकर झारखंड मजदूर संघ (प्रजातांत्रिक) की जिला कमेटी की बैठक हुई। इसमें समस्याओं का समाधान नहीं होने पर 23 नवंबर को डीआरएम कार्यालय, मालदा में मामला उठाने का निर्णय लिया गया।
घंटों इंतजार के बाद भी नहीं मिलता काम :
मजदूरों का कहना है कि स्टोन चिप्स की आपूर्ति में देरी होने से उन्हें रैक लोडिंग के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई बार बिना काम कराए वापस भेज दिया जाता है और लोडिंग का कार्य जेसीबी से कराया जाता है। वहीं, पानी और बिजली की सुविधा नहीं होने से काम के दौरान उन्हें काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

संघ के केंद्रीय महामंत्री राजकुमार यादव ने कहा कि मजदूरों के अधिकारों का हनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। न्यूनतम मजदूरी के साथ बिजली, पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रबंधन की जिम्मेदारी है। उन्होंने चेतावनी दी कि समस्याओं का समाधान नहीं होने पर 23 नवंबर को डीआरएम कार्यालय, मालदा के समक्ष मजदूरों की मांगें रखी जाएंगी। बैठक की अध्यक्षता मुन्ना यादव ने की। मौके पर विजय यादव, राकेश राव, संजय रजक, धर्मेंद्र चौधरी सहित अन्य मजदूर एवं संघ के सदस्य मौजूद थे।
प्रबंधन ने आरोपों को बताया बेबुनियाद, समय पर लोडिंग नहीं होने से नुकसान की बात कही :
इससे पहले भी मजदूरों ने निर्धारित मजदूरी और रैक लोडिंग पॉइंट पर बिजली, पानी एवं शौचालय की व्यवस्था की मांग को लेकर विरोध जताया था। इधर, स्टोन प्रबंधन के प्रतिनिधि ने मजदूरों के आरोपों को बेबुनियाद बताया। उनका कहना है कि मजदूरों द्वारा जितना काम किया जाता है, उसका भुगतान किया जाता है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार मजदूर रैक लोडिंग के काम में मनमानी करते हैं और रेलवे की ओर से निर्धारित समय-सीमा के भीतर लोडिंग पूरी नहीं हो पाती। इससे रेलवे द्वारा डैमरेज चार्ज के रूप में भारी पेनल्टी लगाई जाती है। प्रबंधन के अनुसार, ऐसी स्थिति में मजदूरों से सहयोग की अपेक्षा रहती है।



