झारखंड में एचआरएमएस पोर्टल बंद होने से 300 कनीय पुलिस अधिकारियों और राज्य सेवा के सैकड़ों की प्रोन्नति लटक गई है क्योंकि वे अपनी संपत्ति की घोषणा नहीं कर पा रहे हैं। वित्त मंत्री के हस्तक्षेप के बावजूद कार्मिक सचिव पोर्टल खोलने से इनकार कर रहे हैं।
रांची। कार्मिक प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग के सचिव प्रवीण टोप्पो की बेरुखी से राज्य के 300 कनीय पुलिस अधिकारियों की प्रोन्नति लटक जाएगी। इसका मूल कारण राज्य सरकार के ह्यूमन रिसोर्स मैनेजमेंट सिस्टम (एचआरएमएस) या मानव संपदा पोर्टल बंद होना है।
इसके चलते ये एएसआई से पुलिस निरीक्षक तक के ये 300 पदाधिकारी अपनी संपत्ति की घोषणा नहीं कर पा रहे हैं। जब तक ये अपनी संपत्ति घोषित नहीं करेंगे, तब तक इनका एनुअल कांफिडेंशियल रिपोर्ट (एसीआर) या वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन नहीं लिखा जा सकेगा।
यह नहीं होने से इन अधिकारियों की प्रोन्नति पर विचार नहीं हो सकेगा। इसका असर यह होगा कि इनका जूनियर इनसे सीनियर हो जाएगा। अभी कुछ दिनों के भीतर ही प्रस्तावित प्रोन्नति बोर्ड की बैठक में इनकी प्रोन्नति पर विचार नहीं हो सकेगा।
पीड़ित पुलिस अधिकारियों की समस्या से अवगत होकर वित्त योजना एवं विकास, वाणिज्य कर तथा संसदीय कार्य विभाग के मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भी कार्मिक सचिव से बुलाकर बात की और कहा कि अगर एचआरएमएस पोर्टल खोलने में कोई वैधानिक कठिनाई है तो उसे लिखित रूप से अवगत कराने को कहा, लेकिन कार्मिक सचिव ने पोर्टल खोलने से इंकार किया और लिखित में उन्हें कोई जवाब भी नहीं दिया।
इतना ही नहीं, गृह कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की अनुशंसा को भी कार्मिक सचिव ने नहीं माना। उनकी इस बेरुखी से कनीय पुलिस पदाधिकारी आक्रोशित हैं। कार्मिक विभाग का कहना है कि झारखंड में राज्य सेवा के भी 700 से ज्यादा अफसरों व कर्मियों पर इस मामले में फंसे है। पोर्टल को दोबारा खोलने पर सबके लिए आसान नहीं होगा।

शासन-प्रशासन संवेदनशीलता से चलता है, हठधर्मिता से नहीं: राधाकृष्ण किशोर
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि माओवादी विरोधी अभियान सहित अन्य कई तरह की व्यस्तता के चलते ही पदाधिकारियों ने एचआरएमएस पोर्टल पर अपनी संपत्ति की जानकारी नहीं दी है। यह पोर्टल वर्ष में सिर्फ एक बार जनवरी-फरवरी में ही खोलने संबंधित प्रविधान नियमावली में नहीं है।
अगर कोई पदाधिकारी अपनी संपत्ति की घोषणा पोर्टल पर करना चाहता है तो इसमें क्या वैधानिक कठिनाई है। वित्त मंत्री के अनुसार उन्होंने मुख्य सचिव से पत्राचार कर यह बताया है कि उन्होंने कार्मिक सचिव को अपने कार्यालय कक्ष में बुलाकर भी इसकी जानकारी ली थी, जिसमें कार्मिक सचिव ने भी कहा कि एचआरएमएस पोर्टल वर्ष के बीच में नहीं खोलने का कोई प्रविधान नहीं है।
कार्मिक सचिव ने मंत्री से यही बताया कि अगर वे पोर्टल खोल देंगे तो वैसे पदाधिकारियों की आदत बन जाएगी। ऐसे में एचआरएमएस पोर्टल सालभर खुला रखना पड़ेगा। इसपर मंत्री ने कहा कि अगर सालभर पोर्टल खुला ही रहेगा तो क्या प्रशासनिक क्षति होगी, इसपर कार्मिक सचिव ने पोर्टल खोलने से साफ इंकार किया।
मंत्री ने कहा है कि शासन-प्रशासन संवेदनशीलता से चलता है हठधर्मिता से नहीं। उन्होंने मुख्य सचिव से इसकी समीक्षा कर, इसपर आदेश-निर्देश जारी करने को कहा है।
कार्मिक सचिव ने नहीं रखा अपना पक्ष
इस पूरे मामले में दैनिक जागरण ने कार्मिक सचिव प्रवीण टोप्पो से दूरभाष पर संपर्क का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने काल नहीं उठाया। इतना ही नहीं, उन्होंने वाट्सएप संदेश पर भी अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी, जिसके चलते उनका पक्ष नहीं लिया जा सका। आधिकारिक प्रतिक्रिया आने पर दिया जाएगा।



