किसानों को नकली बीज, मिलावटी खाद से बचाने पर जोर. केंद्रीय मंत्री ने आधुनिक तकनीक, प्राकृतिक खेती और मिट्टी जांच के महत्व पर प्रकाश डाला.
रांची. किसानों को नकली बीज, मिलावटी उर्वरक और घटिया कीटनाशकों से बचाना ज़रूरी है. किसानों की आय बढ़ाने के लिए आधुनिक कृषि तकनीक, मूल्य संवर्धन और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना होगा. कृषि अनुसंधान संस्थानों में विकसित तकनीकों का लाभ देश के सभी किसानों तक पहुंचना चाहिए. ये बातें केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने गुरुवार को रांची के गढ़खटंगा स्थित भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (आइसीएआर-आइआइएबी) में आयोजित प्री-रबी किसान गोष्ठी को संबोधित करते हुए कहीं.
किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील
केंद्रीय राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने किसानों से अपनी कृषि भूमि के एक हिस्से में प्राकृतिक खेती का प्रयोग करने की अपील की. उन्होंने कहा कि मिट्टी की जांच और संतुलित उर्वरकों का इस्तेमाल खेती की लागत घटाने तथा उत्पादकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. किसानों को वैज्ञानिक तरीकों से खेती करने और उपलब्ध कृषि तकनीकों का लाभ उठाने की जरूरत है.
पूर्वी भारत में कृषि क्रांति की व्यापक संभावनाएं
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) के महानिदेशक डॉ एमएल जाट ने कहा कि पूर्वी भारत में कृषि क्रांति की व्यापक संभावनाएं हैं. झारखंड में धान की कटाई के बाद खाली रहने वाले खेतों में रबी फसलों की खेती को बढ़ावा देने की जरूरत है. इससे उपलब्ध कृषि भूमि का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है और किसानों की आय बढ़ाने के अवसर मिल सकते हैं.
कई योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बिरसा मुंडा बहुउद्देशीय सभागार, जयपाल सिंह मुंडा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और नेक्स्टजेन ब्रीडिंग फैसिलिटी का उद्घाटन किया. उन्होंने नये गेस्ट हाउस की आधारशिला भी रखी.
इस कार्यक्रम में रांची, खूंटी, गुमला और रामगढ़ के लगभग 1500 किसान शामिल हुए. किसानों के बीच गेहूं, मटर, सरसों और सब्जियों के उन्नत बीज, नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और मिनरल मिक्सचर सहित विभिन्न कृषि सामग्री का वितरण किया गया.
आदिवासी ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ने पर जोर
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि झारखंड की जनजातीय परंपराओं में प्रकृति, जल और पौधों के संरक्षण की गहरी समझ है. इस पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक कृषि विज्ञान से जोड़कर खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है.
उन्होंने कहा कि झारखंड की जलवायु और स्थानीय संसाधनों के अनुरूप फसलों तथा उन्नत बीजों का चयन जरूरी है. किसानों को वैज्ञानिक जानकारी, प्रशिक्षण और नयी तकनीक उपलब्ध करानी होगी. उन्होंने 22 अक्तूबर से 30 नवंबर तक देशव्यापी खेत बचाओ अभियान शुरू करने का आह्वान किया. इससे पूर्व उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता रूपी सोरेन के निधन पर शोक जताया.
कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए कृषि मंत्री और सचिव
कार्यक्रम में झारखंड की कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की और कृषि सचिव शामिल नहीं हुए. इनके अलावा झारखंड के सांसद और विधायक भी कार्यक्रम में मौजूद नहीं रहे.



