झारखंड हाईकोर्ट जेलों में रिक्त पदों पर नियुक्ति में देरी से नाराज है. गृह सचिव और JSSC सचिव को नोटिस जारी कर 15 अक्टूबर तक जवाब मांगा गया है.
Jharkhad High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की जेलों में रिक्त पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं होने पर नाराजगी जतायी है. गुरुवार को जेल सुधार से जुड़े मामले में स्वत: संज्ञान से दर्ज रिट याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने राज्य सरकार, जेपीएससी और जेएसएससी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाये. अदालत ने कहा कि राज्यभर की जेलों में रिक्त पदों को भरने के लिए छह महीने का समय दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी. मामले में अधिवक्ता मनोज टंडन ने पक्ष रखा.
गृह सचिव और JSSC सचिव को कारण बताओ नोटिस
सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने गृह सचिव और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग के सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया. अदालत ने दोनों से पूछा कि उसके पूर्व आदेशों का अब तक पालन क्यों नहीं किया गया. खंडपीठ ने अधिकारियों को 15 अक्टूबर तक अपना स्पष्टीकरण दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को होगी. अदालत के इस रुख से साफ है कि जेलों में रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया में हो रही देरी को अब हल्के में नहीं लिया जा रहा है.
JPSC और JSSC का पक्ष सुना
सुनवाई के दौरान अदालत ने झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग यानी JSSC का पक्ष भी सुना. दोनों आयोगों की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल और अधिवक्ता प्रिंस कुमार ने पैरवी की. उन्होंने अदालत को अलग-अलग पदों पर चल रही नियुक्ति प्रक्रिया की स्थिति की जानकारी दी और बताया कि किन पदों की प्रक्रिया किस स्तर पर पहुंची है.
JPSC की नियुक्ति प्रक्रिया का विज्ञापन हुआ रद्द
JPSC की ओर से अदालत को बताया गया कि आयोग ने जेलों में रिक्त पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की थी. इसके लिए विज्ञापन भी जारी किया गया था, लेकिन बाद में राज्य सरकार ने उस विज्ञापन को रद्द कर दिया. इसके कारण JPSC की ओर से शुरू की गयी नियुक्ति प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ सकी. आयोग की ओर से अदालत को बताया गया कि सरकार के स्तर से विज्ञापन रद्द होने के बाद पहले की प्रक्रिया समाप्त हो गयी.
JSSC कर रहा कई पदों पर नियुक्ति
JSSC की ओर से बताया गया कि जेल वार्डन, पैरामेडिकल स्टाफ और सहायक कारापाल के पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया आयोग की ओर से की जा रही है. पैरामेडिकल स्टाफ की नियुक्ति के लिए परीक्षा आयोजित की जा चुकी है और उसकी आंसर की भी जारी कर दी गयी है. आयोग ने अदालत को बताया कि करीब दो सप्ताह के भीतर शॉर्टलिस्ट किये गये अभ्यर्थियों की सूची जारी कर दी जाएगी.
सहायक कारापाल और जेल वार्डन का फिजिकल टेस्ट बाकी
सहायक कारापाल और जेल वार्डन के पदों के लिए फिजिकल टेस्ट होना है. यह परीक्षा गृह विभाग की ओर से आयोजित की जानी है. सुनवाई के दौरान JSSC की ओर से अदालत को बताया गया कि गृह विभाग की ओर से अभी तक फिजिकल टेस्ट की प्रक्रिया शुरू नहीं की गयी है. ऐसे में इन दोनों पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है. अदालत के सामने यह स्थिति सामने आने के बाद खंडपीठ ने अधिकारियों से जवाब मांगा.
अदालती आदेश के बावजूद नहीं भरी गयीं रिक्तियां
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात पर विशेष नाराजगी जतायी कि अदालत की ओर से पर्याप्त समय दिये जाने के बावजूद जेलों में रिक्त पदों को भरने की दिशा में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई. खंडपीठ ने अधिकारियों से सवाल किया कि जब छह महीने का समय दिया गया था, तो अब तक नियुक्ति प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं हुई. अदालत ने अपने आदेशों के अनुपालन को लेकर भी स्थिति स्पष्ट करने को कहा.
जेल सुधार को लेकर स्वत: संज्ञान से चल रहा मामला
यह मामला झारखंड में जेलों की व्यवस्था और मॉडल जेल मैनुअल के अनुपालन से जुड़ा है. हाईकोर्ट ने इसे स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के रूप में सुनवाई के लिए लिया है. जेलों में आधारभूत सुविधाओं, प्रशासनिक व्यवस्था और कर्मचारियों की उपलब्धता से जुड़े मुद्दों पर समय-समय पर अदालत स्थिति की समीक्षा करती रही है. इसी क्रम में जेलों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने का मुद्दा भी अदालत के सामने आया.



