झारखंड ने कोयले को GST के दायरे से बाहर कर 5% वैट लगाने की मांग की है. राज्य 1.36 लाख करोड़ के बकाये समाधान और खनिज राज्यों को अतिरिक्त सहायता पर जोर दे रहा है.
रांची. जीएसटी काउंसिल की बैठक में झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कोयले को जीएसटी के दायरे से बाहर कर उस पर 5% वैट लगाने की अनुमति देने की मांग की. उन्होंने राज्य के 1.36 लाख करोड़ रुपये के पुराने बकाये के समाधान और खनिज उत्पादक राज्यों को पर्यावरणीय क्षति के एवज में अतिरिक्त वित्तीय सहायता देने का मुद्दा भी उठाया.वित्त मंत्री ने कहा कि मौजूदा डेस्टिनेशन बेस्ड जीएसटी व्यवस्था में कोयला उत्पादक राज्यों को अपेक्षित राजस्व नहीं मिल रहा है. देश के कुल कोयला भंडार का करीब 23.27% झारखंड में है. वहीं, खनन के कारण राज्य को विस्थापन, पर्यावरणीय नुकसान और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. उन्होंने कोयले को जीएसटी से बाहर कर 5% वैट लगाने का प्रस्ताव रखा. उनके अनुसार, इससे अंतरराज्यीय बिक्री पर उत्पादक राज्यों को 2% सीएसटी लगाने का अवसर मिलेगा और बिजली उत्पादन की लागत भी कम हो सकती है.
नीतिगत बदलावों से 22 हजार करोड़ के अतिरिक्त दबाव का दावा
राधाकृष्ण किशोर ने विभिन्न केंद्रीय नीतियों और कानूनों में बदलाव से झारखंड पर करीब 22,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय दबाव पड़ने का दावा किया. इसमें जीएसटी दरों के युक्तीकरण से 4,000 करोड़ रुपये, वीबी-जीरामजी के फंडिंग पैटर्न में बदलाव से 4,000 करोड़ रुपये और एमएमडीआर एक्ट में संशोधनों से करीब 14,000 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान की बात कही गयी. इसके अलावा, जीएसटी कंपनसेशन सेस समाप्त होने से राज्य को हर साल करीब 2,500 करोड़ रुपये की राजस्व हानि होने का दावा किया गया.
खनिज उत्पादक राज्यों के लिए अलग वित्तीय ढांचे का प्रस्ताव
झारखंड ने खनिज उत्पादक राज्यों के लिए रिसोर्स ओरिजिन एंड इकोलॉजिकल इक्वलाइजेशन फ्रेमवर्क बनाने का प्रस्ताव रखा. इसके तहत खनिजों की मात्रा और मूल्य, इस्तेमाल की गयी वन एवं भूमि, प्रदूषण, पर्यावरण बहाली की लागत, विस्थापन और प्रभावित आदिवासी क्षेत्रों को मुआवजा देने जैसे पहलुओं को आधार बनाने की मांग की गयी. खदान बंद होने के बाद जस्ट ट्रांजिशन की जरूरतों को भी इस ढांचे में शामिल करने का सुझाव दिया गया.
वित्त मंत्री ने जीएसटी में पारदर्शिता के लिए राज्यवार और सोर्स-डेस्टिनेशन आईटीसी सेटलमेंट का विवरण जारी करने की मांग भी की. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय विकास की लागत और उसके लाभ का बंटवारा निष्पक्ष होना चाहिए. बैठक में वाणिज्य कर विभाग के सचिव अमीत कुमार भी शामिल हुए.



