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Atal Bharat News > झारखंड > रांची > विकसित भारत के लक्ष्य पर वित्त मंत्री ने केंद्र पर उठाए सवाल, कहा- पिछड़े राज्यों को मजबूत किए बिना सपना अधूरा  

विकसित भारत के लक्ष्य पर वित्त मंत्री ने केंद्र पर उठाए सवाल, कहा- पिछड़े राज्यों को मजबूत किए बिना सपना अधूरा  

AMRIT RAJ
Last updated: 2026/09/19 at 12:22 PM
AMRIT RAJ
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वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा होगा जब पिछड़े राज्यों को दलीय राजनीति से ऊपर उठकर पर्याप्त वित्त पोषण मिले।

रांची। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने नई दिल्ली में वित्त मंत्रियों के कार्यक्रम के दौरान सभा को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित देश बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा जब दलीय राजनीति से ऊपर उठकर आर्थिक रूप से पिछड़े राज्यों को प्राथमिकता के आधार पर पर्याप्त वित्त पोषण किया जाएगा।

Contents
सामाजिक विकास के बिना आर्थिक विकास का कोई अर्थ नहींकृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर जोरपिछड़े राज्यों को मजबूत करने की जरूरतकेंद्र सरकार से आग्रह

विकसित भारत का लक्ष्य केवल मजबूत अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं बल्कि एक मजबूत समाज का निर्माण भी इसका अभिन्न अंग होना चाहिए। प्रति व्यक्ति आय, सकल घरेलू उत्पाद, विनिर्माण उत्पादन, वित्त पोषण, जलवायु जोखिम प्रबंधन और राजकोषीय प्रबंधन के आंकड़ों के बिना देश की वास्तविक सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सही आकलन संभव नहीं है।

सामाजिक विकास के बिना आर्थिक विकास का कोई अर्थ नहीं

वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि वर्तमान भारतीय राजनीति जाति और धर्म पर आधारित है। यदि देश को जाति और धर्म में बांटकर सत्ता में पहुंचने का उद्देश्य रहा, तो भारत कभी भी सामाजिक रूप से विकसित नहीं हो सकता। सामाजिक रूप से विकसित हुए बिना आर्थिक रूप से विकसित होने का कोई मायने नहीं रह जाता। भारत की प्रति व्यक्ति आय दुनिया के शीर्ष 25 देशों से काफी कम है।

नीति आयोग के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2022-23 में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों की संख्या अनुमानित 11.28% थी और वर्ष 2013-14 से 2022-23 के बीच लगभग 24.8 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाया गया है। दस्तावेज़ में कहा गया है कि भारत को विकसित बनाने के लिए यह आंकड़ा जमीनी स्तर पर प्रभावी होना चाहिए।

कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर जोर

भारत की 70% आबादी गांवों में निवास करती है, यानी देश की 70% अर्थव्यवस्था कृषि पर आधारित है। देश की 50% खेती वर्षा पर निर्भर है। यदि बारिश नहीं होती है, तो लक्ष्य का 50% कृषि उत्पादन प्रभावित होता है। विकसित भारत बनाने के लिए शेष 50% खेतों में सिंचाई की व्यवस्था करना आवश्यक होगा।

इसके अतिरिक्त दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन, पशुपालन और हॉर्टिकल्चर जैसे संबद्ध कृषि क्षेत्रों को बढ़ाने के लिए विशेष वित्त पोषण की आवश्यकता होगी। साथ ही स्वास्थ्य, प्राथमिक, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के लिए पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करना एक बड़ी जिम्मेदारी होगी।

पिछड़े राज्यों को मजबूत करने की जरूरत

यदि केंद्र सरकार सही मायने में 2047 तक भारत को विकसित बनाना चाहती है, तो उसे आर्थिक रूप से पिछड़े राज्यों को मजबूत करना होगा। संघीय ढांचे के कारण भारत का अस्तित्व राज्यों से है, और बिना राज्यों के विकसित हुए भारत विकसित नहीं हो सकता।

झारखंड का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में गैर-भाजपा सरकार होने के कारण पिछले छह वर्षों से केंद्र सरकार द्वारा पर्याप्त आर्थिक सहयोग से झारखंड को वंचित रखा जा रहा है। इसके विपरीत, केंद्र की आर्थिक नीतियों जैसे माल और सेवा कर युक्तिकरण तथा मनरेगा योंजना में बदलाव कर वीबी-जीरामजी लागू किए जाने से झारखंड को लगभग 8,000 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति होने का अनुमान है।

हाल के दिनों में केंद्र सरकार द्वारा ‘खान-खनिज विकास विनियमन’ में किए गए संशोधन से खनिज युक्त भूमि पर राज्यों द्वारा नए टैक्स/सेस लगाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। फलस्वरूप झारखंड को लगभग 14,000 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति होने का अनुमान है।

इस प्रकार केंद्र की नीतियों के कारण झारखंड को कुल मिलाकर 20,000 से 22,000 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होने का अनुमान है। इसके अलावा एमएमडीआर एक्ट में धारा-9(डी) को जोड़े जाने से झारखंड सरकार विभिन्न कोल कंपनियों के पास वर्षों से बकाया एक लाख 36 हजार करोड़ रुपये की मांग नहीं कर सकेगी।

केंद्र सरकार से आग्रह

  • अन्य राज्यों की तरह झारखंड को भी खनन कार्य पर सेस लगाने के अधिकार को पुनर्बहाल किया जाए।
  • जीएसटी के कर युक्तिकरण से झारखंड को होने वाली क्षति की भरपाई मुआवजे के रूप में हो।
  • देश के पिछड़े राज्यों में मनरेगा को ही लागू किया जाए। 
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