मानव तस्करी पीड़ितों की सुरक्षा और पुनर्वास के लिए बनेगी ठोस कार्ययोजना, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका और कानूनी सहायता शामिल होगी।
रांची. झारखंड में मानव तस्करी की रोकथाम के साथ तस्करी से मुक्त कराये गये पीड़ितों की सुरक्षा और पुनर्वास के लिए अब ठोस कार्ययोजना तैयार की जायेगी. इसके तहत संबंधित विभागों की जिम्मेदारी और जवाबदेही तय की जायेगी. पीड़ितों को उनकी जरूरत के अनुसार शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, आजीविका, कानूनी सहायता और परामर्श जैसी सेवाओं से जोड़ने पर जोर दिया गया है.इस संबंध में बुधवार को झारखंड शिक्षा परियोजना सभागार में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गयी. महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की ओर से आयोजित कार्यशाला में मानव तस्करी की रोकथाम और पीड़ितों के पुनर्वास को लेकर विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर चर्चा हुई.
केवल बचाव नहीं, जरूरत के अनुसार पुनर्वास जरूरी
समाज कल्याण निदेशक किरण कुमारी पासी ने कहा कि मानव तस्करी के मामलों में केवल पीड़ितों को मुक्त करा लेना पर्याप्त नहीं है. उनके लिए जरूरत के अनुसार पुनर्वास योजना तैयार करना जरूरी है. उन्होंने कहा कि इसके लिए सभी संबंधित विभागों की स्पष्ट भूमिका और जवाबदेही तय करते हुए मजबूत कार्ययोजना विकसित की जानी चाहिए.
उन्होंने पीड़ितों को उनकी जरूरत के अनुसार विभिन्न सरकारी सेवाओं और योजनाओं से जोड़ने पर जोर दिया, ताकि वे सामान्य जीवन की ओर लौट सकें.
कमजोर परिवारों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर
सीआइडी के पुलिस महानिरीक्षक अजय लिंडा ने कहा कि गरीब और कमजोर परिवारों तक केंद्र व राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना जरूरी है. इससे परिवारों का सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण होगा और मानव तस्करी के जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी.
उन्होंने तस्करी की रोकथाम के लिए कमजोर परिवारों की पहचान और उन्हें सरकारी सहायता से जोड़ने की जरूरत बतायी.
कई विभागों और संस्थाओं के प्रतिनिधि हुए शामिल
राज्य स्तरीय कार्यशाला में गृह विभाग, शिक्षा विभाग, विधिक सेवा प्राधिकरण, यूनिसेफ समेत विभिन्न विभागों और संस्थाओं के प्रतिनिधि शामिल हुए. कार्यशाला में मानव तस्करी की रोकथाम, पीड़ितों की सुरक्षा, पुनर्वास और सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए विभागों के बीच समन्वय मजबूत करने पर चर्चा की गयी.



